एबीवीपी ने एनएलएसआईयू में उमर खालिद पर वृत्तचित्र का प्रदर्शन रोकने की मांग की

एबीवीपी ने एनएलएसआईयू में उमर खालिद पर वृत्तचित्र का प्रदर्शन रोकने की मांग की

एबीवीपी ने एनएलएसआईयू में उमर खालिद पर वृत्तचित्र का प्रदर्शन रोकने की मांग की
Modified Date: September 13, 2026 / 03:37 pm IST
Published Date: September 13, 2026 3:37 pm IST

बेंगलुरु, 13 सितंबर (भाषा) एबीवीपी ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में कार्यकर्ता उमर खालिद पर बने एक वृत्तचित्र की प्रस्तावित स्क्रीनिंग का रविवार को विरोध किया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बेंगलुरु इकाई ने एक बयान में कहा कि उसने एनएलएसआईयू प्रशासन को शिकायत देकर 14 सितंबर को प्रस्तावित स्क्रीनिंग रद्द करने की मांग की थी, लेकिन उसे अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

संगठन ने कहा, ‘‘एबीवीपी बेंगलुरु ने एनएलएसआईयू परिसर में ललित वाचानी द्वारा उमर खालिद पर बनाए गए वृत्तचित्र ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रजेंट’ की प्रस्तावित स्क्रीनिंग की कड़ी निंदा करती है।’’

एबीवीपी ने आरोप लगाया कि 2016 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रदर्शनों के दौरान नारेबाजी, अफजल गुरु की बरसी, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए)- राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) विरोधी प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों को लेकर उमर खालिद का नाम विवादों से जुड़ा रहा है।

संगठन ने कहा कि शैक्षणिक परिसरों में राजनीतिक प्रचार के बजाय पढ़ाई और राष्ट्रीय एकता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

एबीवीपी नेताओं ने कहा, ‘‘शैक्षणिक परिसरों को राजनीतिक प्रचार या नागरिक अशांति को बढ़ावा देने के मंच के बजाय, राष्ट्रीय अखंडता और शिक्षा के प्रति समर्पित रहना चाहिए।’’

अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने भी शनिवार को एनएलएसआईयू के कुलपति और रजिस्ट्रार को ईमेल भेजकर प्रस्तावित स्क्रीनिंग रद्द करने का आग्रह किया। उन्होंने यह ईमेल मीडिया के साथ भी साझा किया।

भारद्वाज ने कहा कि मुकदमा पूर्व हिरासत, जमानत, असहमति, संवैधानिक स्वतंत्रता और आपराधिक न्याय प्रणाली जैसे मुद्दों पर अकादमिक चर्चा से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इन विषयों पर चर्चा संतुलित कार्यक्रम के माध्यम से की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता के साथ संस्थागत जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है और विश्वविद्यालय को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम पर पुनर्विचार करना चाहिए।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल


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