चेन्नई, चार मार्च (भाषा) तमिलनाडु के चेन्नई स्थित सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण ने बुधवार को अभिनेता रजनीकांत के खिलाफ दायर सेवा कर के अनुरोध को खारिज कर दिया।
न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाया कि किसी इमारत को होटल के रूप में किराए पर देना कर योग्य सेवाओं के दायरे से विशेष रूप से बाहर रखा गया है।
यह मामला ‘वसंत भवन होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ को राघवेंद्र मंडपम नाम की बहुमंजिला इमारत के पट्टे को लेकर हुए विवाद से संबंधित था।
राजस्व अधिकारियों ने जून 2007 से जून 2012 की अवधि के लिए लगभग 56.8 लाख रुपये के सेवा कर की मांग की थी।
अधिकारियों ने दलील दी थी कि संपत्ति का उपयोग रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल और हेल्थ क्लब सहित व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।
तकनीकी सदस्य एम. अजीत कुमार और न्यायिक सदस्य अजयन टी. वी. की खंडपीठ ने पाया कि रेस्तरां और सम्मेलन कक्ष जैसी सुविधाओं की उपस्थिति से संपत्ति के उपयोग का विभाजन नहीं होता।
न्यायाधिकरण ने कहा कि ये सुविधाएं होटल संचालन की अभिन्न व आकस्मिक क्रिया हैं और इनका उद्देश्य मेहमानों की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
राजस्व विभाग ने दलील दी थी कि वित्त अधिनियम की व्याख्या दो के तहत आंशिक रूप से व्यवसाय और आंशिक रूप से अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली संपत्तियों को वाणिज्यिक संपत्ति माना जाना चाहिए।
न्यायाधिकरण ने हालांकि इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि परिसर होटल द्वारा उपयोग किए जाने वाले भवन के रूप में ही रहता है, जो अधिनियम की धारा 65(105) में दिए गए विशिष्ट अपवाद के अंतर्गत आता है।
पीठ ने समवर्ती पीठों और उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों पर भरोसा किया, जिनसे यह स्थापित हुआ कि विधायिका का उद्देश्य होटलों के लिए उपयोग की जाने वाली अचल संपत्ति पर कर लगाना नहीं था।
भाषा जितेंद्र सुरेश
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