नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की ओर से शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किए जाने के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के अदिति महाविद्यालय और श्याम लाल कॉलेज ने छात्रों से ‘कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि’ से दूर रहने की अपील की है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का समर्थन किया है, जिनका इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल है।
अदिति महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्य नीलम राठी ने बृहस्पतिवार को फेसबुक पोस्ट में छात्रों से अपनी ऊर्जा और समय पढ़ाई, शोध, नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों में लगाने की अपील की।
उन्होंने छात्रों से ‘हिंसक प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि’ से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और संवाद, संवैधानिक तरीके तथा शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति ही सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की नींव हैं।
राठी ने छात्रों से शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से अपनी बात रखने, अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों के मार्गदर्शन का सम्मान करने तथा सोशल मीडिया पर अपुष्ट या भड़काऊ सामग्री साझा करने से बचने को भी कहा।
उन्होंने कहा, ‘आइए हम सभी संकल्प लें कि ज्ञान को अपना सबसे बड़ा हथियार, शिक्षा को अपना सर्वोच्च लक्ष्य और राष्ट्र निर्माण को अपना कर्तव्य बनाएंगे।’
कॉजपा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी 20 जून से मध्य दिल्ली में धरना दे रहे हैं। वे नीट प्रश्न पत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सोमवार को कॉजपा के नेतृत्व में विरोध मार्च में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने संसद तक पहुंचने का प्रयास किया जिस दौरान हिंसा में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए।
श्याम लाल कॉलेज ने धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में एक संदेश जारी किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कॉलेजों की ओर से जारी किए गए संदेशों की यह कड़ी है, जिनकी शिक्षकों और छात्रों के एक वर्ग ने आलोचना की है।
इससे पहले राजधानी कॉलेज ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इसी तरह की एक पोस्ट हटा दी थी और सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उसे उस पोस्ट पर खेद है और वह छात्रों के साथ खड़ा है।
हालांकि, शहीद भगत सिंह कॉलेज समेत अन्य कॉलेजों की ओर से मंत्री के समर्थन में संदेश जारी किए जाने का सिलसिला जारी है।
शिक्षक संगठनों ने राजनीतिक रूप से विवादित मुद्दे पर शिक्षण संस्थानों की ओर से सार्वजनिक रुख अपनाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों को इसके बजाय परीक्षा प्रणाली और जारी शैक्षणिक सुधारों को लेकर छात्रों की चिंताओं का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए।
भाषा तान्या वैभव
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