नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने बंगाल की खाड़ी और पूर्वी हिंद महासागर में भारत की युद्ध संबंधी तैयारियों की व्यापक समीक्षा के तहत, विभिन्न खतरे वाली परिस्थितियों में उन्नत संचालन अभ्यासों की एक श्रृंखला का अवलोकन किया।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद और क्षेत्र में बदलती सुरक्षा स्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना ने रणनीतिक महत्व के समुद्री मार्गों में आक्रामक रुख बनाए रखा है।
एडमिरल त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को पूर्वी बेड़े की इकाइयों की परिचालन तैयारियों का आकलन करने के लिए दौरा किया।
नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि एडमिरल त्रिपाठी ने पूर्वी नौसेना कमान की इकाइयों को संबोधित किया और उन्होंने पूरी तरह से नेटवर्क से जुड़े परिचालन वातावरण में आधुनिक हथियारों, सेंसर एवं मानवरहित प्रणालियों की तैनाती में बखूबी प्रशिक्षित नौसेना कर्मियों की ‘‘महत्वपूर्ण भूमिका’’ को रेखांकित किया।
नौसेना प्रमुख ने प्लेटफार्मों और कर्मियों की तत्परता के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसमें पूर्वी बेड़े की समुद्री अभियानों के संपूर्ण परिदृश्य में काम करने की क्षमता को रेखांकित किया गया।
नौसेना प्रवक्ता ने बताया, ‘‘नौसेना प्रमुख ने विभिन्न खतरे वाली परिस्थिति में आयोजित उन्नत संचालन अभ्यासों की एक श्रृंखला का अवलोकन किया। इनमें युद्धाभ्यास, फायरिंग और उड़ान संचालन शामिल थे।’’
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकार की तैयारी और पेशेवरता राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए ‘‘कभी भी, कहीं भी, किसी भी तरह’’ केंद्रीय महत्व रखती है।
भाषा सुभाष रंजन
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