नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार की मौत के बाद मंगलवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े हत्या के एक मामले में उनकी सजा को चुनौती देने की अपील का मामला बंद कर दिया।
सज्जन कुमार 1984 के दंगों से जुड़े मामले में तिहाड़ जेल में दोहरी उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उनकी 20 अगस्त को मौत हो गई।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा, “इसे (कुमार के निधन) देखते हुए, वर्तमान अपील को समाप्त किया जाता है।”
मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा था। इकत्तीस अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए थे।
बारह फरवरी 2025 को दोषी ठहराए जाने के बाद 25 फरवरी 2025 को यहां की एक अदालत ने कुमार को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत ने कहा था कि “दो निर्दोष लोगों” की हत्या भी कम गंभीर अपराध नहीं थी, लेकिन यह ऐसा “दुर्लभतम मामला” नहीं था, जिसमें मौत की सजा दी जाए।
निचली अदालत ने कुमार को पीड़ितों के घर में आग लगाने वाली भीड़ का हिस्सा होने के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। भीड़ ने दोनों पीड़ितों की “बेरहमी से हत्या” करने के साथ-साथ उनका सामान भी लूट लिया था।
अदालत ने कुमार पर करीब 2.4 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
इससे पहले, 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में कुमार को पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप