नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) ग्वालियर में एक युवक को अपनी कार पर प्रेमिका के करीब 3,400 ‘लिपस्टिक किस मार्क्स’ लगवानने पर यातायात पुलिस ने 5,500 रुपये का जुर्माना लगाया और निशान हटाने का निर्देश दिया, जिससे मोटर वाहन कानून का यह प्रावधान भी सुर्खियों में आ गया है कि गाड़ियों में अनधिकृत बदलाव नहीं किए जा सकते हैं।
इस कार का एक वीडियो वायरल हुआ जिसके बाद यातायात पुलिस ने वाहन का पता लगाया और उसके मालिक पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया। साथ ही उसे लिपस्टिक के निशान हटाने का निर्देश भी दिया।
ग्वालियर में असामान्य कार्रवाई दिल्ली के चालकों के सामने एक प्रासंगिक प्रश्न खड़ा करती है कि राष्ट्रीय राजधानी में गाड़ियों में किस तरह के बदलाव वाहन मालिक को परेशानी में डाल सकते हैं?
दिल्ली यातायात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोई शख्स गाड़ी खरीदने के बाद उसमें स्वतंत्र रूप से बदलाव नहीं करा सकता है।
अधिकारी ने कहा, ‘जब कोई किसी शोरूम से वाहन खरीदता है, तो उसमें निर्धारित यातायात और मोटर वाहन दिशानिर्देशों का अनुपालन होता है। किसी भी अन्य बदलाव के लिए अनुमति लेनी होगी, जिसकी जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाएगी। अनुमति दी जानी चाहिए या खारिज कर दी जाएगी, यह सत्यापन के बाद और उस कारण के आधार पर तय किया जाएगा जिसके लिए मालिक बदलाव करना चाहता है।’
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 के तहत वाहनों में किए जाने वाले बदलावों को विनियमित किया गया है। इस प्रावधान के अनुसार वाहन में ऐसा कोई संशोधन नहीं किया जा सकता, जो उसके पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) में दर्ज विवरण से अलग हो।
अधिकारी ने कहा कि ऐसे परिवर्तन जो वाहन के स्वरूप या निर्धारित विशिष्टताओं को काफी हद तक बदल देते हैं, उसपर कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि वाहन की मूल पहचान को बदलने या छिपाने वाले किसी भी परिवर्तन, आवश्यक अनुमति के बिना वाहन का पूरा रंग बदलने या काले शीशों जैसी प्रतिबंधित फिटिंग लगाने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर प्रवर्तन एजेंसियां वाहन को जब्त करने या उसके खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई भी कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि नियमों के सबसे आम उल्लंघनों में से एक काले शीशे लगाना है। दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार वाहनों पर काली फिल्म लगाना प्रतिबंधित है। वाहन में कंपनी द्वारा लगाए गए शीशे इतने पारदर्शी होने चाहिए कि विंडस्क्रीन और पीछे की खिड़की से कम से कम 70 फीसदी रोशनी अंदर आ सके और साइड की खिड़कियों से कम से कम 50 फीसदी रोशनी अंदर आ सके।
अधिकारी ने कहा कि तेज़ आवाज़ वाले साइलेंसर भी एक चिंता का विषय हैं, खासकर मोटरसाइकिलों के मामले में।
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत गाड़ियों में तय ध्वनि मानकों का पालन करने वाले साइलेंसर ही लगाए जाने चाहिए।
इसी तरह, अतिरिक्त या अत्यधिक तेज रोशनी वाली हेडलाइट, अनधिकृत अतिरिक्त लाइट और उच्च बीम का अनुचित उपयोग कार्रवाई का कारण बन सकता है। शहरी क्षेत्रों में हाई-बीम का उपयोग अन्य वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है और इस पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारी ने बताया कि ‘प्रेशर हॉर्न’ और ‘मल्टी-टोन हॉर्न’ भी प्रतिबंधित हैं। वाहन मालिक ऐसे हॉर्न नहीं लगा सकते जो अत्यधिक तेज और चुभने वाली या लोगों को परेशान करने वाली आवाज पैदा करते हों।
भाषा नोमान नोमान रंजन
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