कर्नाटक में एसआईआर के दौरान 1.08 करोड़ मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में

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कर्नाटक में एसआईआर के दौरान 1.08 करोड़ मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 07:13 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 07:13 PM IST

(फोटो के साथ)

बेंगलुरु, 25 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से अपील की कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और अन्य’ (एएसडीडीओ) श्रेणी में रखे गए करीब 1.08 करोड़ लोगों को दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि इतनी लंबी होनी चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

सीईसी को लिखे पत्र में शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में 5.54 करोड़ मतदाताओं में से करीब हर पांचवां मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद करीब 43.80 लाख मतदाताओं को ‘तार्किक विसंगतियों’ या 2002 की मतदाता सूची से उनका नाम जुड़े होने का प्रमाण नहीं मिलने के संबंध में सत्यापन नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि अकेले बेंगलुरु में 46.88 लाख मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है। इसके परिणामस्वरूप कर्नाटक में करीब 1.50 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, जब तक कि वे अपने नाम बनाए रखने या नए सिरे से शामिल किए जाने के लिए दावे दाखिल नहीं करते।

शिवकुमार ने कहा कि ‘अनुपस्थित’ श्रेणी में रखे गए कई लोग वास्तविक मतदाता हो सकते हैं, जो काम, स्वास्थ्य या अन्य जायज कारणों से उस समय घर पर मौजूद नहीं थे, जब बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) उनके यहां पहुंचे और वे अपना गणना प्रपत्र जमा नहीं कर सके।

उन्होंने कहा कि इसी तरह, जो मतदाता दूसरे मतदान केंद्र के क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, उन्हें बीएलओ के घर-घर दौरे के दौरान नए पते पर गणना प्रपत्र जमा करने का अवसर नहीं मिला, जबकि पुराने पते की मतदाता सूची से उनके नाम हटा दिए गए।

मुख्यमंत्री ने सीईसी से दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए कहा कि मसौदा सूची में नाम नहीं होने वाले वास्तविक मतदाताओं (जिनमें एएसडीडीओ श्रेणी के लोग भी शामिल हैं) को अपनी स्थिति जानने और फॉर्म-6 के माध्यम से दावा दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने के कारण इस अवधि को बढ़ाना पूरी तरह संभव है।

शिवकुमार ने सीईसी से मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को शहरी क्षेत्रों में वार्ड समितियों की बैठक और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाएं आयोजित करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने इन बैठकों के लिए पर्याप्त समय पहले व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने का भी अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि सत्यापन का सामना कर रहे मतदाताओं को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, ‘तार्किक विसंगतियों’ और 2002 की मतदाता सूची से नाम का लिंक नहीं होने से जुड़े मामलों में नोटिस जारी करने और उनका निपटारा करने के लिए प्रस्तावित करीब 45 दिनों की अवधि काफी कम है।

शिवकुमार ने कहा कि मतदाता को जवाब देने के लिए करीब एक सप्ताह का समय और उसके बाद दूसरा नोटिस देना कामकाजी लोगों, प्रवासियों तथा बुजुर्गों के लिए अनुचित बोझ डाल सकता है, खासकर तब जब जरूरी दस्तावेज जुटाने या यात्रा करने की जरूरत हो।

शिवकुमार ने कहा कि प्रत्येक मतदाता को जवाब देने और जरूरी दस्तावेज पेश करने के लिए कम से कम तीन से चार सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए, ताकि किसी प्रतिकूल निर्णय से पहले उसे अपनी पात्रता साबित करने का वास्तविक अवसर मिल सके।

उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करने के साथ-साथ मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना होना चाहिए।

शिवकुमार ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग की दोहरी जिम्मेदारी है-सटीक मतदाता सूची तैयार करना और यह सुनिश्चित करना कि कोई वास्तविक एवं पात्र मतदाता बाहर न हो। ये दोनों उद्देश्य परस्पर विरोधी नहीं हैं। पर्याप्त समय और उचित प्रक्रिया के साथ दोनों हासिल किए जा सकते हैं।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य ऐसी मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए जिस पर कर्नाटक की जनता भरोसा कर सके-जिसमें प्रत्येक पात्र नागरिक शामिल हो, प्रत्येक अपात्र प्रविष्टि हटाई जाए और किसी नागरिक को केवल पर्याप्त समय, जानकारी या अपनी पात्रता साबित करने का अवसर न मिलने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

भाषा

रविकांत दिलीप

दिलीप