आस्था कुंज पार्क घटना के बाद निवासियों ने डीडीए पार्कों की सुरक्षा और बेहतर रखरखाव की मांग की

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आस्था कुंज पार्क घटना के बाद निवासियों ने डीडीए पार्कों की सुरक्षा और बेहतर रखरखाव की मांग की

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  • Publish Date - September 27, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - September 27, 2026 / 06:11 PM IST

नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालकाजी इलाके में स्थित आस्था कुंज पार्क में 17-वर्षीय एक लड़की के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने 142 एकड़ में फैले इस विशाल हरित क्षेत्र और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अन्य पार्कों की सुरक्षा एवं रखरखाव से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (आरडब्ल्यूए) ने पार्कों में रोशनी की खराब व्यवस्था, टूटी चारदीवारी और अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की ओर ध्यान खींचा है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि डीडीए के पार्कों में शाम के समय रोशनी की व्यवस्था बेहद खराब रहती है और चारदीवारी के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हैं, जिससे इन परिसरों और इनके आसपास होने वाली गतिविधियों की निगरानी करना काफी कठिन होता है।

नवजीवन आरडब्ल्यूए की सचिव रूबी मखीजा ने कहा, ‘सबसे बड़ी समस्याओं में से एक यह है कि ये पार्क बहुत बड़े है और डीडीए के अधीन है, लेकिन इनकी कोई ठीक से देखभाल करने वाला नहीं है। हाल की घटना ने इस समस्या को उजागर किया है। यदि डीडीए इन पार्कों का ठीक से रखरखाव करने में असमर्थ है तो उसे स्थानीय लोगों को पार्क सुरक्षा समितियां बनाने की अनुमति देनी चाहिए, जिसमें आरडब्ल्यूए, पुलिस अधिकारी और अन्य सदस्य हों।’

यह सुझाव सार्वजनिक पार्कों के प्रबंधन को राज्य-वित्तपोषित मॉडल से सार्वजनिक-निजी भागीदारी के सहयोगात्मक मॉडल में बदलने की वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है।

हाल में ही हुई एक घटना में सोमवार को पार्क में पुलिसकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने फरीदाबाद की निवासी लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया। इस घटना के कारण डीडीए द्वारा रखरखाव किए जाने वाले पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू हो गई है, विशेषकर रात के समय। साथ ही इसके कई प्रवेश और निकास बिंदुओं की भी निगरानी की जा रही है।

आस्था कुंज पार्क का रखरखाव डीडीए करता है। डीडीए दिल्ली में 16,000 एकड़ से अधिक हरित संपत्तियों का प्रबंधन करता है, जिनमें 700 से अधिक पार्क, जैव विविधता क्षेत्र, शहरी वन, क्षेत्रीय पार्क और अन्य उद्यान शामिल हैं।

‘ईस्ट ऑफ कैलाश’ के निवासी के.के. आनंद ने कहा, ‘आस्था कुंज कभी हमारे लिए हर सुबह-शाम जाने की सबसे पसंदीदा जगह हुआ करती थी। मैं और मेरा बेटा नियमित रूप से वहां टहलने जाते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। डीडीए को उसके नियंत्रण में आने वाले सार्वजनिक स्थानों की स्थिति और प्रबंधन के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है और ठहराया भी जाना चाहिए।’’

आस्था कुंज के पास स्थित संत नगर आरडब्ल्यूए के महासचिव वैभव गुप्ता ने कहा, ‘‘जांच से जो तथ्य सामने आए हैं, उससे दिल्ली के प्रमुख सार्वजनिक पार्कों में से एक के प्रबंधन को लेकर डीडीए पर मूलभूत सवाल खड़े होते हैं। यदि डीडीए को पार्कों के प्रभावी रखरखाव के लिए बाहरी एजेंसियों या अन्य मॉडल अपनाने की आवश्यकता है तो उसने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पार्कों में सुरक्षा और रखरखाव की एक सुसंगत और प्रभावी प्रणाली क्यों नहीं बनाई?”

डीडीए ने कहा, ‘‘रात्रि पाली में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। परिसर के हर कोने की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित गश्त की जा रही है। टॉर्च और अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ बाइक गश्त की जा रही है। इसके अलावा दृश्यता और सुरक्षा बेहतर करने के लिए चिह्नित स्थानों पर अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की जा रही है।’’

भाषा प्रचेता सुरेश

सुरेश