(कृष्ण)
सीकर (राजस्थान), 19 सितंबर (भाषा) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीक संदिग्ध मामलों को छांटने में मदद कर रही हैं, जो खांसी की आवाज में तपेदिक (टीबी) के बेहद हल्के संकेतों का पता लगाने और किसी क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान करने में सक्षम हैं। इससे चिकित्सक लक्षण सामने आने से पहले ही मरीजों की जांच कर इलाज शुरू कर पा रहे हैं।
टीबी मामलों के विशेषज्ञों और राजस्थान के सीकर जिले के अधिकारियों ने बताया कि एआई उपकरण उन मरीजों की भी पहचान कर रहे हैं, जिनके लिए खर्च या अन्य कारणों से इलाज की निगरानी से बाहर होने का जोखिम बढ़ जाता है। इससे ऐसे मरीजों की अधिक करीबी से निगरानी की जा रही है और सफल इलाज की संभावना बढ़ रही है।
राजस्थान ने इस साल मार्च में नयी दिल्ली स्थित गैर-लाभकारी एआई समाधान प्रदाता संस्था ‘वाधवानी एआई’ के सहयोग से राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत अपने सभी जिलों में तीन एआई जांच तकनीकों का इस्तेमाल शुरू किया था, जिनमें ‘कफ अगेंस्ट टीबी’ (सीएटी), ‘वल्नरेबिलिटी मैपिंग फॉर टीबी’ (वीएमटीबी) और ‘प्रिडिक्शन ऑफ एडवर्स टीबी आउटकम्स’ (पीएटीओ) शामिल हैं।
माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया के कारण होने वाली टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने पर यह हवा के जरिए फैल सकती है। इसके लक्षणों में लगातार खांसी, सीने में दर्द, बुखार, वजन कम होना और थकान शामिल हैं।
सीकर के जगदीशपुरी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी हेमंत बड़बड़वाल ने बताया कि सीएटी किसी व्यक्ति की खांसी की आवाज का विश्लेषण करता है और उसे ‘संभावित टीबी’ या ‘गैर-संभावित टीबी’ मामले के रूप में चिह्नित करता है।
संभावित टीबी मामले से आशय ऐसे व्यक्ति से है, जिसमें टीबी के संकेत या लक्षण दिखाई देते हैं और जिसकी पुष्टि के लिए जांच की आवश्यकता होती है।
बड़बड़वाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जब यह ऐप नहीं था, तब संदिग्ध मामलों की पहचान कम हो पाती थी। लेकिन, इस एआई उपकरण की मदद से हम संदिग्ध मामलों की पहचान कर रहे हैं और फिर आगे की प्रक्रिया शुरू करते हैं, चाहे वह छाती का एक्स-रे हो या अन्य शुरुआती जांच।’’
फिलहाल टीबी की जांच ‘न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट’ (एनएएटी) के जरिए की जाती है। यह एक त्वरित जांच है, जो बलगम के नमूनों में टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया का पता लगाती है।
राजस्थान के राज्य टीबी अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने कहा कि सीएटी की मदद से संभावित टीबी मामलों का शुरुआती दौर में पता लगाना सबसे प्रमुख पहलू है।
सीकर के जिला टीबी अधिकारी डॉ. रतन लाल जाट के अनुसार, ‘वल्नरेबिलिटी मैपिंग फॉर टीबी’ (वीएमटीबी) उपकरण जिले के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में भी उपयोगी साबित हो रहा है।
भाषा
शफीक धीरज
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