चेन्नई, छह मई (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की हार के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजग के खराब प्रदर्शन का प्रमुख कारण भाजपा-अन्नाद्रमुक गठबंधन नहीं है।
कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके और वामपंथी दलों के गठबंधन का नेतृत्व करने वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के खिलाफ भाजपा और अन्नाद्रमुक ने गठबंधन किया था।
हालांकि इस साल की शुरुआत में भाजपा और अन्नाद्रमुक गठबंधन में अंतर्कलह देखने को मिली थी जब तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने विधानसभा चुनाव के लिए अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन का विरोध किया था।
राजनीतिक समीक्षक सत्यलाया रामकृष्णन ने कहा कि साल 2024 का लोकसभा चुनाव अन्नाद्रमुक और भाजपा ने अलग-अलग लड़ा था, तब भी दोनों को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी।
उन्होंने कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव में तो अल्संख्यक मतदाताओं के महत्वपूर्ण समर्थन के बावजूद द्रमुक को भी संघर्ष करना पड़ा।
उन्होंने कहा, “इस बार, लोगों की पसंद बिल्कुल अलग थी और वे पूरी तरह से बदलाव चाहते थे।”
रामकृष्णन ने कहा कि अगर भाजपा और अन्नाद्रमुक अलग-अलग चुनाव लड़ते तब भी चुनाव परिणाम कुछ अलग नहीं होता।
उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक के महासचिव के. पलानीस्वामी और टीवीके प्रमुख विजय ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी जीत दर्ज की है जबकि “स्टालिन कोलाथुर से अपनी सीट नहीं जीत सके, लिहाजा यह जनादेश था।”
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि विपक्ष विभाजित था, ऐसे में द्रमुक अच्छा प्रदर्शन कर सकती थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन को लेकर अन्नामलाई की झिझक की वजह यह थी कि वह चाहते थे भाजपा राज्य में मजबूत विकल्प बने, न कि द्रविड़ विचारधारा वाले दलों की जूनियर सहयोगी।
उन्होंने कहा, “अन्नाद्रमुक और भाजपा अलग-अलग चुनाव लड़तीं तो उनकी व्यक्तिगत क्षमता का पता चला।”
उन्होंने कहा कि कुछ खबरें मिली हैं कि भाजपा के नेतृत्व वाले चुनाव प्रचार अभियान में अन्नाद्रमुक के कार्यकर्ताओं का सहयोग नहीं मिला, जिसकी वजह से चुनाव में गठबंधन का प्रदर्शन खराब रहा।
हालांकि, अन्नाद्रमुक के पूर्व पार्षद के. विल्वम ने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए बाधा बना।
विल्वम ने कहा, “अगर अन्नाद्रमुक अकेले चुनाव लड़ती तो अल्पसंख्यकों के और ज्यादा वोट हासिल कर सकती थी।”
भाषा
जोहेब संतोष
संतोष