पेट के कैंसर की जटिल सर्जरी में एम्स विशेषज्ञों ने ‘रेज ट्रायंगल’ को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बताया
पेट के कैंसर की जटिल सर्जरी में एम्स विशेषज्ञों ने ‘रेज ट्रायंगल’ को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बताया
(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) पेट के कैंसर की जटिल सर्जरी के दौरान शरीर में कैंसर से ग्रस्त कोई भी ऊतक छूट न जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि लिवर को पूरी तरह से अलग करना और पेट के ऊपरी हिस्से की छिपी हुई जगहों की सावधानी से जांच करना बेहद जरूरी है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है।
एम्स दिल्ली के डॉ. बीआरए-आईआरसीएच में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. एमडी रे और उनके एमसीएच छात्र डॉ. अनिक राठी की ओर से किए गए अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया है कि सर्जन को लिवर के पीछे और उसके आसपास के हिस्सों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए, क्योंकि वहां कभी-कभी कैंसर के अंश छिपे हो सकते हैं।
अध्ययनकर्ताओं ने लिवर और एक प्रमुख नस (आईवीसी) के मिलन बिंदु के पास स्थित एक छोटे, लेकिन उच्च जोखिम वाले हिस्से की भी पहचान की है, जिसे उन्होंने ‘रेज ट्रायंगल’ नाम दिया है। उन्होंने बताया कि ‘रेज ट्रायंगल’ एक अहम हिस्सा है, जिसकी जनकारी सर्जन को लिवर को अलग करते समय होनी चाहिए।
‘जर्नल ऑफ द इजिप्शियन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट’ में छपे इस अध्ययन में अंडाशय के कैंसर से पीड़ित उन 205 मरीजों का विश्लेषण किया गया, जिनकी जनवरी 2014 और दिसंबर 2025 के बीच एम्स दिल्ली में लिवर को हटाने से जुड़ी सर्जरी हुई थी।
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि अंडाशय के गंभीर कैंसर और पेट की परत से जुड़े कैंसर से जूझ रहे मरीजों में बीमारी से ग्रस्त सभी ऊतकों को हटाना लंबे जीवन की संभावना को बढ़ाने वाला एक अहम कारक है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि स्कैन में कैंसर से ग्रस्त सभी ऊतकों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है या वे लिवर के नीचे, ‘डायफ्राम’ के साथ, लिवर के पीछे या अन्य ऐसे क्षेत्रों में छिपे रह सकते हैं, जहां पहुंचना कठिन होता है।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि लिवर को “पूरी तरह” अलग करके सर्जन इन हिस्सों की जांच कर पाते हैं और कैंसर का कोई भी दिखाई देने वाला अंश हटा सकते हैं।
अध्ययन के दौरान जिन 205 मरीजों का विश्लेषण किया गया, उनमें से 194 (यानी 94.6 फीसदी) में कैंसर के दिखाई देने वाले अंश को पूरी तरह या लगभग पूरी तरह से हटा दिया गया। 178 मरीजों में कैंसर के दिखाई देने वाली सभी अंश को हटा दिया गया, जबकि 16 रोगियों में थोड़ी मात्रा में बीमारी का अंश रह गया।
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, ‘रेज ट्रायंगल’ कोई औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त शारीरिक संरचना नहीं है, बल्कि सर्जरी के दौरान ध्यान देने वाला एक व्यावहारिक क्षेत्र है, जहां मुख्य नस, लिवर और इन्फीरियर वेना कावा (आईवीसी) आपस में मिलते हैं।
भाषा पारुल संतोष
संतोष

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