गैर संचारी रोग सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं, उपनगरों और गांवों में भी बढ़ रहे रोगी: अध्ययन
गैर संचारी रोग सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं, उपनगरों और गांवों में भी बढ़ रहे रोगी: अध्ययन
कोयंबटूर (तमिलनाडु), 20 सितंबर (भाषा) पिछले कई वर्षों से यह माना जाता था कि शहरी जीवन में लगातार व्यस्तता, अंतहीन प्रतिस्पर्धा और हर चीज की समयसीमा, बैठकर कई घंटे तक काम और डिलीवरी ऐप्स व लिफ्ट जैसी शहरी सुविधाएं उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह जैसी गैर संचारी बीमारियों (एनसीडी) को बढ़ावा देती हैं। इसकी वजह से ये माना जाता था कि ये बीमारियां केवल शहरों तक सीमित हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है।
कोवई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल (केएमसीएच) रिसर्च फाउंडेशन ने कहा कि ग्रामीण, उपनगरीय और शहरी कोयंबटूर के व्यक्तियों पर 10 से अधिक वर्षों तक किए गए एक ठोस अध्ययन में पता चला कि “गैर-संचारी बीमारियां अब केवल एक शहरी समस्या नहीं रह गई हैं”।
केएमसीएच ने कहा कि उसके अध्ययन में पता चला कि कोयंबटूर और उसके आसपास के उपनगरीय व ग्रामीण समुदायों में उच्च रक्तचाप के नए मामलों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी को पीछे धकेल दिया है।
ये निष्कर्ष इस व्यापक धारणा को चुनौती देते हैं कि एनसीडी मुख्य रूप से एक शहरी समस्या है। ये परिणाम शनिवार और रविवार को कोयंबटूर में आयोजित ‘भारतीय ग्रामीण सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं गैर-संचारी रोगों पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ में प्रस्तुत किए गए।
अध्ययन की शुरुआत में लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं थी, लेकिन जब कुछ साल बाद उनकी दोबारा जांच की गई तो पता चला कि कस्बों और गांवों के लोगों में भी यह बीमारी बहुत तेजी से फैली है। इस दौरान गांवों के लगभग 31.5 प्रतिशत लोगों को उच्च रक्तचाप की शिकायत हो गई, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 37.0 प्रतिशत रहा। वहीं सबसे चौंकाने वाले नतीजे शहरों से सटे कस्बों या उपनगरों में देखे गए, जहां 44.4 प्रतिशत लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए।
केएमसीएच ने कहा कि उसका एनसीडी अध्ययन 2015 में कोयंबटूर और उसके आसपास के ग्रामीण, उपनगरीय और शहरी समुदायों के बीच शुरू हुआ था, जिसमें अलग-अलग चरण में करीब 9,600 प्रतिभागियों का आकलन किया गया। सबसे हालिया सर्वेक्षण 2026 में पूरा हुआ।
भाषा जोहेब प्रशांत
प्रशांत

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