सर्वदलीय बैठक: विपक्ष की राम मंदिर समेत कई विषयों पर चर्चा की मांग, सरकार ने की सहयोग की अपील

सर्वदलीय बैठक: विपक्ष की राम मंदिर समेत कई विषयों पर चर्चा की मांग, सरकार ने की सहयोग की अपील

सर्वदलीय बैठक: विपक्ष की राम मंदिर समेत कई विषयों पर चर्चा की मांग, सरकार ने की सहयोग की अपील
Modified Date: July 19, 2026 / 03:52 pm IST
Published Date: July 19, 2026 3:52 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) विपक्षी दलों ने संसद का मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी, पेपर लीक, एथनॉल और कई अन्य विषयों पर चर्चा की मांग उठाई, जबकि सरकार ने उनसे दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील करते हुए कहा कि हंगामे से सिर्फ देश का नहीं, बल्कि ऐसा करने वाली पार्टियों को भी नुकसान होता है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि सत्र के लिए आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया और यदि कोई अतिरिक्त विधायी कामकाज होगा, उस बारे में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में चर्चा होगी तथा राजनीतिक दलों को सूचित किया जाएगा।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कई अन्य विपक्षी दलों ने दो टूक कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन वे इसकी आड़ में किए जाने वाले परिसीमन के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) में बगावत से संबंधित मामलों को लेकर ‘‘संपूर्ण विपक्ष’’ ने बैठक से कुछ देर के लिए बहिर्गमन किया।

विपक्ष का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों की बगावत के मामले में अंतिम निर्णय अभी लंबित है तो फिर इस गुट को ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) के रूप में बैठक में आमंत्रित किया जाना उचित नहीं है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (उबाठा) के छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। साथ ही, कम चर्चित राजनीतिक दल एनसीपीआई में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को भी स्वीकृति प्रदान कर दी।

सर्वदलीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, गौरव गोगोई, प्रमोद तिवारी और कोडिकुनिल सुरेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए।

विपक्षी दलों ने बैठक में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने, विदेश नीति, पेपर लीक, मणिपुर की स्थिति, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली तथा कुछ अन्य विषय उठाए।

सर्वदलीय बैठक के बाद रीजीजू ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा लाए जाने वाले विधेयकों को सार्थक चर्चा के साथ पारित करना चाहिए।

रीजीजू ने एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा करने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों वाले गुट को बैठक में बुलाने के फैसले को उचित करार देते हुए कहा कि इस समूह ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था का आग्रह किया है और ऐसे में इतने सदस्यों को वह बैठक से कैसे दूर रख सकते थे।

उन्होंने इस विषय को लेकर विपक्षी दलों के बैठक से कुछ देर के लिए बहिर्गमन करने को लेकर कहा कि यह उनका अधिकार है और यह एक तकनीकी तथा सांकेतिक विरोध था।

उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष संसद को सुचारू रूप से चलने देगा।

रीजीजू ने कहा, ‘‘विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी बात रखी और कई सुझाव दिए, जिन्हें सरकार ने नोट किया है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘सर्वदलीय बैठक में अलग-अलग मत होते हैं। मैं सभी दलों के नेताओं से आग्रह करता हूं कि संसद सत्र में जो विधेयक सरकार लेकर आएगी, उन पर सहयोग करें और सार्थक चर्चा के साथ उन्हें पारित करें।’’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अगर चर्चा से दूर रहकर हंगामा करते हैं तो उन्हें राजनीतिक लाभ नहीं मिलता और यह बात साबित हो चुकी है।

मानसून सत्र के लिए विधायी कामकाज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल आठ विधेयकों की सूची बुलेटिन के माध्यम से दी गई है। इसके अलावा यदि कोई विधेयक लाया जाता है तो कार्य मंत्रणा समिति में चर्चा के बाद उसे लाया जाएगा।

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान अयोध्या राम मंदिर ‘‘चंदा चोरी’’, एथनॉल, छात्रों से जुड़े मुद्दों और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन विषयों पर चर्चा से भागती है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर से ‘चढ़ावा चोरी’ के मामले, प्रश्नपत्र लीक, निर्वाचन आयोग की कथित एकपक्षीय कार्यवाही, सरकारी सेवाओं में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग की कथित उपेक्षा तथा एथेनॉल के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सांसद तिरुची शिवा ने कहा कि सरकार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने तथा परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर स्पष्ट फार्मूला सामने रखना चाहिए तथा यह आरक्षण निचले सदन के वर्तमान संख्याबल के आधार पर दिया जाना चाहिए।

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि सरकार को विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के समूह को बुलाया जाना न्याय का उपहास है।

सरकार ने इस सत्र के लिए कुछ नए विधेयकों की घोषणा की है जिन्हें आगामी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

लोकसभा सचिवालय के एक बुलेटिन के मुताबिक, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने, उस पर विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है। इसके माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना चाहती है।

इसके अलावा, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पेश करने, विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है।

सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जो सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को कर छूट देने के प्रावधान को औपचारिक रूप देने के लिए लाए गए अध्यादेश का स्थान लेने वाला विधेयक है।

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और इसके 13 अगस्त तक चलने की संभावना है।

भाषा हक हक नेत्रपाल

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