प्रयागराज, 19 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामलों के बारे में गलत जानकारी देने के कारण उत्तर प्रदेश सरकार को 50,000 रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है।
आरोपी की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी थी कि पुलिस ने आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करने के लिए उसके आपराधिक इतिहास के बारे में गलत जानकारी दी थी जिससे उसकी रिहाई में 15 दिनों का विलंब हुआ।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फुरकान नाम के एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। फुरकान को एक कार की चोरी से जुड़े मामले में पिछले वर्ष नवंबर में गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, इस मामले की गुणदोष पर विचार करते हुए अदालत ने 10 मार्च को पारित आदेश में आरोपी को जमानत दे दी।
आरोपी के वकील ने यह कहते हुए पुलिस विभाग के खिलाफ आदेश पारित करने का अनुरोध किया था कि उसका मुवक्किल 23 फरवरी को जमानत पर रिहा हो सकता था, लेकिन पुलिस द्वारा यह दावा करने कि उसके खिलाफ पांच के बजाय 12 आपराधिक मामले हैं, आरोपी 15 दिन अधिक जेल में निरुद्ध रहा।
अदालत ने पाया कि जांच अधिकारी द्वारा गलत जानकारी दी गई थी और आरोपी ने पांच आपराधिक मामलों के बारे में पहले ही बता दिया था। इसलिए 50,000 रुपये का भुगतान आज से एक महीने के भीतर राज्य सरकार द्वारा याचिकाकर्ता को किया जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर गौर करने से यह स्पष्ट है कि जांच अधिकारी की ओर से किसी दुर्भावनावश यह काम नहीं किया गया, बल्कि उसकी लापरवाही के कारण यह गलती हुई जिसकी वजह काम का बोझ हो सकता है।
आरोपी द्वारा अपने आपराधिक इतिहास के बारे में आपत्ति किए जाने पर अदालत ने अपर महानिदेशक (तकनीकी सेवा) नवीन अरोड़ा को तलब किया था। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 10 मार्च को पेश हुए अरोड़ा ने जांच अधिकारी की गलती स्वीकार की।
अरोड़ा ने बताया कि किसी आरोपी के आपराधिक इतिहास का अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (सीसीटीएनएस) के जरिए पता लगाना बहुत आसान है। अंतर–प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) के जरिए केस डायरी तक पहुंच की सुविधा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में संयुक्त निदेशक (अभियोजन) को दी गई है, लेकिन उन्होंने कार्यालय में कर्मचारियों की कमी के कारण इस सुविधा का लाभ लेने से मना कर दिया।
अदालत ने निदेशक (अभियोजन) को संयुक्त निदेशक कार्यालय में पर्याप्त कर्मचारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जिससे केस डायरी निकालने की सुविधा का लाभ उठाया जा सके।
भाषा सं राजेंद्र सुरभि
सुरभि