प्रयागराज, 10 जनवरी (भाषा) जन्म तिथि में हेराफेरी के एक मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त को याचिकाकर्ता और संबंधित ग्राम पंचायत के अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने शिव शंकर पाल नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पाल ने अपने पासपोर्ट पर जन्म तिथि ठीक करने का पासपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया था।
जब अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण किया तो याचिकाकर्ता का दावा ‘‘मूर्खतापूर्ण’’ पाया।
अदालत ने देखा कि याचिकाकर्ता ने हाई स्कूल की परीक्षा 2011 में उत्तीर्ण की है। इस पर पीठ ने सवाल किया कि यह कैसे संभव है कि 2005 में जन्मा कोई व्यक्ति 2011 में छह वर्ष की उम्र में इस परीक्षा के लिए बैठा हो।
अदालत ने इस स्थिति को हैरतअंगेज बताते हुए कहा कि “व्यापक भ्रष्टाचार” के परिणाम स्वरूप इस हद तक दस्तावेजों में हेराफेरी की गई।
अदालत ने याचिकाकर्ता और चार नवंबर, 2025 को जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले ग्राम पंचायत के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। ग्राम पंचायत ने जन्म तिथि 11 जुलाई, 2005 दर्शाते हुए जन्म प्रमाण पत्र जारी किया था।
अदालत ने पाया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा 2011 में जारी याचिकाकर्ता के हाईस्कूल प्रमाण पत्र में उसकी जन्म तिथि 11 जुलाई, 1994 में अंकित है। इसके अलावा, पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय भी जमा किए गए आधार कार्ड में यही जन्म तिथि अंकित है।
हालांकि, रिट याचिका के साथ संलग्न आधार कार्ड की प्रति में जन्म तिथि 11 जुलाई, 2005 दिखाई गई है। इससे संकेत मिलता है कि बाद में बदलाव किया गया।
याचिकाकर्ता ने अपने पासपोर्ट में सुधार के लिए ग्राम पंचायत, प्रयागराज द्वारा पिछले वर्ष नवंबर में जारी जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया जिसमें याचिकाकर्ता की जन्म तिथि 11 जुलाई, 2005 प्रमाणित की गई है।
इस दावे की मूर्खता को रेखांकित करते हुए अदालत ने कहा, “यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि यदि याचिकाकर्ता की दलील स्वीकार कर भी ली जाए और जन्म तिथि को ठीक कर लिया जाए तो हाईस्कूल परीक्षा का प्रमाण पत्र यह दर्शाता है कि याचिकाकर्ता ने करीब छह वर्ष की आयु में यह परीक्षा दी थी।”
“सत्यनिष्ठा के अभाव” और रिकॉर्ड में स्पष्ट “हेराफेरी” पर कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त को तत्काल प्रभाव से प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया।
अदालत ने पांच जनवरी के अपने आदेश में चेतावनी दी कि यदि इस निर्देश का अनुपालन नहीं किया जाता है तो अदालत प्रयागराज के पुलिस आयुक्त के खिलाफ कदम उठाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 27 जनवरी, 2026 निर्धारित की।
भाषा सं राजेंद्र सिम्मी
सिम्मी