नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किए गए एक अमेरिकी समेत सात विदेशियों के मोबाइल फोन डेटा के विश्लेषण के लिए भेजे गए हैं ताकि भारतीय जातीय समूहों का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने की बड़ी साजिश का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आरोपियों के सोशल मीडिया खातों की जांच की जा रही है ताकि वित्तपोषण के स्रोत, साजिश के सूत्र और उनके अज्ञात सहयोगियों का पता लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि इन आरोपियों में छह यूक्रेनी नागरिक हैं।
पिछले सप्ताह एक गुप्त सूचना के आधार पर, आव्रजन ब्यूरो ने इन सात व्यक्तियों को उस समय हिरासत में लिया जब वे भारत के प्रमुख पारगमन केंद्रों से होकर गुजरने का प्रयास कर रहे थे। बाद में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
एनआईए की प्राथमिकी के अनुसार, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर पर्यटक वीजा पर भारत में दाखिल हुए थे और असम के गुवाहाटी गये थे तथा फिर वहां आवश्यक प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी)/संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) के बिना मिजोरम पहुंच गये।
इसमें कहा गया है कि तब इस समूह ने म्यांमा में ‘अवैध रूप से’ प्रवेश किया ताकि वहां के जातीय सशस्त्र समूहों (ईएजी) के लिए एक पूर्व-निर्धारित प्रशिक्षण आयोजित किया जा सके। ये ईएजी ड्रोन युद्ध और जैमिंग तकनीक के क्षेत्र में भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं।
प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘ये ईएजी प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों को हथियार और अन्य आतंकवादी उपकरण मुहैया कराकर एवं उन्हें प्रशिक्षण देकर उन्हें सहयोग पहुंचा रहे हैं, जिससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और हित प्रभावित हो रहे हैं।’’
अमेरिकी नागरिक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (एसओएलआई)’ के संस्थापक हैं। उनका दावा है कि वह ‘लीबियाई क्रांति’ का हिस्सा रहे हैं।
छह यूक्रेनी नागरिकों—हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर को पहले दिल्ली और लखनऊ हवाई अड्डों पर हिरासत में लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि उन सभी पर म्यांमार में सशस्त्र मिलिशिया की कथित रूप से मदद करने के लिए गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है तथा ये सशस्त्र मिलिशिया भारत विरोधी विद्रोही समूहों के साथ मिलकर काम करते हैं।
वैनडाइक का संगठन एसओएलआई कमजोर आबादी को आतंकवादियों और विद्रोहियों से खुद का बचाव करने में सक्षम बनाने के लिए मुफ्त सुरक्षा परामर्श, प्रशिक्षण, आपूर्ति और अन्य सेवाएं प्रदान करता है। कहा जाता है कि इसने यूक्रेन, वेनेजुएला, फिलीपींस और इराक में ‘मिशन’ आयोजित करने में मदद की है।
एसओएलआई की वेबसाइट के अनुसार, ‘ऑपरेशन नाइनवेह राइजिंग’ के माध्यम से, उसने पूर्व अमेरिकी सैनिकों की टीमों की तैनाती में सहायता की, ताकि सैकड़ों असीरियन (जातीय समुदाय) को युद्ध के मैदान में आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस)’ को हराने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।
अधिकारियों ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने अब इन सात आरोपियों के जब्त किए गए मोबाइल फोन को डेटा निकालने और उसके विश्लेषण के लिए विशेष साइबर सुरक्षा एजेंसी ‘इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन)’ के पास भेज दिया है।
प्राथमिकी में कहा गया है,‘‘आरोपियों द्वारा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए रची जा रही साजिश का पर्दाफाश करने के लिए उनके मोबाइल फोन के डेटा का विश्लेषण करना बेहद महत्वपूर्ण है।’’
सुरक्षा एजेंसियां अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों से उनके द्वारा चुने गए मार्ग के बारे में पूछताछ कर रही हैं और उनके उन अज्ञात सहयोगियों को पकड़ने का प्रयास कर रही हैं जो अब भी फरार हैं।
अधिकारियों ने बताया कि एजेंसियां आरोपियों की सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं ताकि उनके अज्ञात सहयोगियों की पहचान की जा सके।
उन्होंने बताया कि आरोपियों पर ईएजी के वास्ते यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार में ड्रोन की भारी खेप पहुंचने का भी आरोप है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके वित्तपोषण के स्रोत और ‘मुख्य साजिशकर्ता’ का भी पता लगाया जा रहा है।
गिरफ्तार व्यक्तियों को 14 मार्च को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 11 दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेज दिया।
अदालत ने हर 48 घंटे के बाद उनकी चिकित्सा जांच का भी आदेश दिया है और उन्हें हर दूसरे दिन 20 मिनट के लिए अपने-अपने वकीलों/रिश्तेदारों से मिलने की अनुमति दी है।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान सभी संवैधानिक और वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किया गया तथा उनकी गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना उन्हें अंग्रेजी के साथ-साथ उनकी मातृभाषा में भी दी गई और इसकी पावती भी प्राप्त हुई।
यूक्रेन के दूतावास ने बृहस्पतिवार को मीडिया की उन खबरों का कड़ा संज्ञान लिया जिनमें संकेत दिया गया था कि इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत रूसी पक्ष द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर ‘आधारित’ है।
दूतावास ने कहा, ‘‘यूक्रेन आतंकवादी गतिविधियों में साथ देने में अपनी संभावित संलिप्तता के आरोपों को दृढ़ता से खारिज करता है।
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने पिछले साल मार्च में कहा था कि जून से दिसंबर 2024 तक लगभग 2,000 विदेशी मिजोरम आए थे और उनमें से कई पर्यटक बनकर नहीं आए थे और बिना किसी को पता चले राज्य से चले गए थे।
उन्होंने कहा कि म्यांमा जाने वाले विदेशी मिजोरम का गुप्त रूप से पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग कर रहे हैं, जो केंद्र सरकार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
भाषा राजकुमार पवनेश
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