हिंदी को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं का संरक्षण भी जरूरी : नगालैंड के राज्यपाल

हिंदी को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं का संरक्षण भी जरूरी : नगालैंड के राज्यपाल

हिंदी को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं का संरक्षण भी जरूरी : नगालैंड के राज्यपाल
Modified Date: September 24, 2026 / 08:16 pm IST
Published Date: September 24, 2026 8:16 pm IST

कोहिमा, 24 सितंबर (भाषा) नगालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं का संरक्षण भी होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि भाषाई विविधता भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक शक्तियों में से एक है।

यादव ने कहा कि अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद के माध्यम के रूप में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि स्थानीय भाषाएं समुदायों को उनकी जड़ों और पहचान से जोड़े रखती हैं।

राज्यपाल हिंदी पखवाड़ा 2026 के तहत आकाशवाणी कोहिमा द्वारा आयोजित हिंदी फिल्म गीत प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि नगालैंड में विभिन्न जनजातियां, भाषाएं, बोलियां, परंपराएं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि हर भाषा अपने साथ किसी समुदाय का इतिहास, पारंपरिक ज्ञान, मूल्य, गीत और कहानियां संजोए हुए है।

यादव ने यह भी कहा कि हिंदी पखवाड़े की भावना केवल इस पखवाड़े तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अन्य भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी का सम्मान करते हुए हिंदी को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

उन्होंने युवाओं से एक से अधिक भाषाएं सीखने का आग्रह किया और स्थानीय भाषाओं तथा उनमें निहित पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

हिंदी फिल्मी गीत प्रतियोगिता के बारे में यादव ने कहा कि संगीत भाषाई सीमाओं से परे जाकर आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मी गीत भारतीयों की कई पीढ़ियों की साझा सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा बन चुके हैं।

राज्यपाल ने समाचार, सूचना, शिक्षा, संगीत, संस्कृति और जनसंदेश उपलब्ध कराने में आकाशवाणी की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नगालैंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में आकाशवाणी की यह भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

भाषा तान्या अविनाश

अविनाश


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