नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने मंगलवार को अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाने की मल्लिकार्जुन खरगे की मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि वह हमेशा विपक्ष के नेता के दबाव में रहते हैं।
राधाकृष्णन यह बात एक बार के स्थगन के बाद उच्च सदन की बैठक दोपहर बारह बजे पुन: शुरू होने पर कही। दोपहर 12 बजे बैठक शुरू होने पर सभापति ने प्रश्नकाल शुरू किया।
इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे खड़े हुए और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाने की मांग की।
सभापति ने इसकी अनुमति नहीं दी और कहा कि उन्होंने सत्ता पक्ष के सदस्यों को भी ‘झारखंड मुद्दा’ उठाने की अनुमति नहीं दी है क्योंकि यह राज्य से जुड़ा विषय है।
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता राज्य से जुड़े विषय को उठा रहे हैं, इसलिए इसे प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।’’
सभापति ने कहा कि वह विपक्ष को हर दिन एक ही मुद्दा उठाकर सदन की कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं दे सकते।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने आपको (विपक्ष को) कई बार अनुमति दी है। आप जिस विषय को उठा रहे हैं, वह राज्य का विषय है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस तरफ (सत्ता पक्ष) के सदस्य भी कुछ राज्य के विषय उठाना चाहते हैं और मैंने उन्हें भी अनुमति नहीं दी है। वे झारखंड का मुद्दा उठाना चाहते थे और मैंने कहा कि यह राज्य का विषय है। मैं किसी भी राज्य के विषय को उठाने की अनुमति नहीं दूंगा।’’
उन्होंने यह बात खरगे सहित प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से कही, जो अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखे हुए थे।
झारखंड का मुद्दा सोमवार को रांची में राज्य सरकार की नौकरी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से जुड़ा है।
इसके बाद सभापति ने विपक्ष के नेता से अपनी सीट पर बैठने को कहा और सूचीबद्ध कार्यवाही आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘कृपया अपनी सीट पर बैठ जाइए खरगे जी… मैं केवल आपकी वजह से दबाव में हूं। सत्ता पक्ष के सदस्य मुझ पर कभी दबाव नहीं डालते। आप हमेशा मुझ पर दबाव डालते हैं।’’
सभापति ने यह प्रतिक्रिया खरगे की उस टिप्पणी के जवाब में दी, जिसमें उन्होंने हंगामे के दौरान कहा था कि पीठासीन अधिकारी हमेशा सरकार के दबाव में रहते हैं।
विपक्षी सदस्यों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
भाषा मनीषा माधव
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