नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय मंगलवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार 2006 के प्रकाश सिंह मामले में शीर्ष अदालत के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद के संभावित उम्मीदवारों की सूची में एक कनिष्ठ अधिकारी को शामिल करने का प्रयास कर रही है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
मौजूदा डीजीपी वाई. बी. खुरानिया इस वर्ष 16 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
शीर्ष अदालत के 2006 के फैसले और प्रकाश सिंह मामले में बाद के निर्देशों में कहा गया था कि राज्य के डीजीपी का चयन ‘‘राज्य सरकार द्वारा विभाग के उन तीन वरिष्ठतम अधिकारियों में से किया जाएगा जिन्हें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा उनकी सेवा अवधि, बहुत अच्छे रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने के अनुभव के आधार पर पदोन्नति के लिए सूचीबद्ध किया गया हो।’’
इस पद पर चयनित किये जाने वाले व्यक्ति की सेवानिवृत्ति की तारीख चाहे जो भी हो, उसका न्यूनतम कार्यकाल कम से कम दो साल का होना चाहिए।
चिदंबरम ने दलील दी कि ओडिशा सरकार यूपीएससी को जो सूची भेज रही है उसमें एक अयोग्य अधिकारी को शामिल करने की कोशिश कर रही है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम इस पर कल सुनवाई करेंगे।’’
चिदंबरम ने दलील दी कि ओडिशा में नियुक्ति के लिए तीन पात्र अधिकारियों की सूची पर विचार करने के लिए यूपीएससी की बैठक 7 अगस्त को होनी थी, लेकिन राज्य सरकार ने अधिकारियों की सूची वापस ले ली।
उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा राज्य प्रकाश सिंह मामले में आए फैसले का उल्लंघन कर रहा है। सात अगस्त को यूपीएससी की बैठक होनी थी। ओडिशा ने सूची वापस ले ली। अब वे भेजने के लिए दूसरी सूची बना रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) को पदोन्नत करने और उस अधिकारी को नयी सूची में शामिल करने की कोशिश कर रही है।
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