Amit Shah Speech In Parliament: सदन में राहुल गांधी पर भड़के अमित शाह, इस नेता से भाषण देने की कला सीखने की दी नसीहत
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Amit Shah Speech In Parliament: नई दिल्लीः महिला आरक्षण बिल को लेकर बुलाए गए संसद के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन है। लोकसभा में देश के गृहमंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने कहा कि, सबने बोला है कि, हम इसके पक्ष में है। हम स्वागत करते हैं मगर उसको बारिकी से देखें तो इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने अगर, मगर, किंतु, परंतु, का उपयोग करते साफ रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। मैं साफ करना चाहता हूं कि ये विरोध केवल महिला आरक्षण का है। इम्पलीमेंटेशन का नहीं है। मैं जब बोलता हूं तब मेरी जिम्मेदारी बनती है कि, (Amit Shah Speech In Parliament) मैं सदन को कन्वींस करूं कि महिला आरक्षण का विरोध है। तरीकों का विरोध नहीं है। इन 3 बिलों में इसका मकसद मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। अमित शाह ने सदन में यह घोषणा की है कि आने वाला 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ होगा। सरकार ने जो तीन बिल पेश किए हैं, उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन आयोग के गठन के लिए परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 शामिल हैं।
कैसा भाषण देना है राहुल प्रियंका से सीखें
Amit Shah Speech In Parliament: अपने भाषण के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि, मैं टीवी पर विपक्ष के नेता का भाषण सुन रहा था। आपकी जिम्मेदारी है कि सदन की गरिमा बनी रही। वे कहते हैं कायर हैं, सरेंडर कर रहे हैं। असंसदीय शब्दों की भरमार लग जाती है। कभी आंख मारते हैं। ये किस तरह का बिहेवियर है। आपकी भाषा को देश सुन रहा है।
संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं। फ्लाइंग किस करते हैं। आंख मारते हैं। सत्र छोड़कर विदेश चले जाते हैं। (Amit Shah Speech In Parliament) ये भाषाओं में तीव्रता से बावनाएं व्यक्ति नहीं होती। प्रियंका से थोड़ा सीख लें कि सदन में कैसे बोलते हैं। ये जानबूझकर दिया गया स्टेटमेंट है। हजारों साल पहले रामसेतु बनाने के लिए जिस गिलहरी ने योगदान दिया था, उस गिलहरी को भी यहां याद किया जाता है। आप महिला आरक्षण देने वाला बिल में विरोध की हड्डियां डाल रहे हैं।
विपक्ष बिना सोचे-समझे कर रहा विरोध
गृह मंत्री शाह ने अपने भाषण में आगे कहा कि, विपक्ष ने अच्छा बुरा सोचे बिना पीएम मोदी जो करे रहे हैं, उसका विरोध करने का ठान लिया है। देश की माताओं बहनों के लिए आरक्षण आ रहा है तो लग रहा था विरोध नहीं होगा। लेकिन हो रहा है। मैं अभी बताया कि 2023 में सर्वसम्मति से ये बिल पारित हुआ लेकिन आज कांग्रेस पीछे हट रही है। इसके दो ही कारण हैं- क्योंकि बिल मोदी जी ला रहे हैं और क्रेडिट उन्हें मिलेगा।
पीएम मोदी ने उन्हें एड देकर क्रेडिट देने का कह दिया फिर भी ये नहीं मान रहे हैं। (Amit Shah Speech In Parliament) हमारे नेता ने कहा कि अंतरआत्मा की आवाज से वोट करिए। अंतरआत्मा की आवाज का नारा इंदिरा गांधी का है। यहां आत्मा ही नदारद है। चुनाव में जहां जहां जाओगे, महिलाओं का आक्रोश फेस करना पड़ेगा।
सभी राज्यों का सदन पर बारबर हक़
Amit Shah Speech In Parliament: अपने भाषण के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिण के राज्यों को लेकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि, दक्षिण के राज्यों का भी सदन पर उतना ही हक़ है जितना उत्तर का है। उन्होंने आगे कहा कि, छोटे से यूटी लक्षदीप का भी सदन पर उतना ही हक है जितना बिहार का है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि, यह टुकड़ों में नहीं देखना चाहिए, उत्तर-दक्षिण का भेद नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे कहा कि, हम जो शपथ लेते हैं वो पूरे भारत की शपथ होती है। उन्होंने विपक्ष के लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि, देश के अंदर विभाजन करके कोई सत्ता नहीं पा सकते और इस नैरेटिव में कोई भी कभी सफल नहीं हो पाएगा।
शाह बोले- हर सीट पर वोटर्स की संख्या अलग-अलग
अपने भाषण के दौरान गृह मंत्री शाह ने कहा कि, इन 3 बिलों में इसका मकसद मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। पहला- महिला सशक्तिकरण करने वाले इस संविधान सुधार को लागू करके 2029 का चुनाव इसके आधार पर हो। ये पूरे सदन में 543 सदस्य हैं। किसी की सीट में वोटर्स की संख्या 49 लाख है किसी की 60 हजार है। (Amit Shah Speech In Parliament) कई ऐसे हैं जो 70 के दशक में फ्रीज हो गई हैं जहां सांसद वोटर्स को मुंह भी नहीं दिखा सकते। क्योंकि क्षेत्र इतना बडा हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि, क्या इस सदन में जो विरोध करते हैं, मुझे समझा सकते हैं कि जिस सांसद के क्षेत्र में 49 लाख वोटर्स हो वो कैसे जिम्मेदारी निभाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए संविधान में समय समय पर परिसीमन का प्रावधान है।
मोदी सरकार की है परिसीमन की जिम्मेदारी
Amit Shah Speech In Parliament: गृह मंत्री शाह ने कहा- परिसीमन के चलते जिस वर्ग यानी एससी और एसटी, जिसकी संख्या बढ़ती है , (Amit Shah Speech In Parliament) सीटें भी बढ़ती है। संतुलित समावेशी और व्यवहारिक लोकतांत्रिक ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सरकार की है। अभी ये जिम्मेदारी मोदी सरकार की है। ये देश की जनता तय करती है। ये वंश, परंपरागत नहीं होती।
सदस्यों के कई सवाल, उनका जवाब दूंगा
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा- नए भूगोल, प्रशासनिक, और शहरीकरण, रोड, रास्ते और रेल केनक्टिवीटी के अलावा नए जिले का संज्ञान परिसीमन में लेना होता है। क्योंकि सांसद की ड्यूटी की निर्वहन के लिए ये सब जरूरी होता है। कई सदस्यों ने अनेक आशंकाए व्यक्त कीं। कहा कि अभी क्यों लाए। मैं बताना चाहता हूं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियिम में जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणनाके बाद जो चुनाव होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण होगा।
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