Amit Shah vs Akhilesh Yadav : ‘आप किसके पक्ष में बोल रहे हैं?’… अखिलेश ने इस बात पर टोका तो शाह ने ली चुटकी, कांग्रेस को लेकर भी कही ये बड़ी बात
महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने अखिलेश यादव के सवाल पर तंज कसते हुए परिसीमन की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पुराने फैसलों के कारण ही आज कानूनी अड़चनें सामने आ रही हैं।
Amit Shah vs Akhilesh Yadav / Image Source : screengrab
- अमित शाह का अखिलेश यादव के सवाल पर तंज, परिसीमन की जरूरत पर जोर
- कांग्रेस पर लगाया सीट फ्रीज कर असंतुलन पैदा करने का आरोप
- विपक्ष से सहयोग की अपील—ताकि वोट का मूल्य समान हो सके
नई दिल्ली : Amit Shah vs Akhilesh Yadav महिला आरक्षण बिल पर जारी चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन को लेकर जो भी कानूनी अड़चनें हैं, वे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के फैसलों का परिणाम हैं। उन्होंने विपक्ष से परिसीमन की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की ताकि वोटों का मूल्य समान किया जा सके।
अखिलेश यादव के सवाल पर तंज
बहस के दौरान अमित शाह ने बताया कि 127 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहाँ आबादी 20 लाख से ज्यादा है। इस पर अखिलेश यादव ने टोकते हुए पूछा कि ये आंकड़े कब के हैं और यदि ताजा आंकड़े बताए जाएं तो यह संख्या दोगुनी हो सकती है। अखिलेश के इस सवाल पर अमित शाह ने कहा, “इनको ये भी नहीं पता है कि वे तर्क अपने पक्ष में दे रहे हैं या विपक्ष में।” शाह का आशय था कि आबादी बढ़ने का तर्क परिसीमन की आवश्यकता को और भी मजबूती देता है, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है। शाह ने विश्वास दिलाया कि यदि विपक्ष परिसीमन में सहयोग करे, तो मतदाताओं के प्रतिनिधित्व का असंतुलन खत्म हो जाएगा।
Women Reservation Bill 2026 1972 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सीटें फ्रीज कर दी थीं
अमित शाह ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि 1972 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सीटें फ्रीज कर दी थीं और इमरजेंसी के दौरान परिसीमन पर रोक लगा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश को दशकों तक परिसीमन से वंचित रखा और आज भी वह इसमें अड़ंगा डालना चाहती है। जब विपक्ष ने याद दिलाया कि 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने परिसीमन को 2026 तक के लिए आगे बढ़ाया था, तो शाह ने पलटवार करते हुए कहा, वाजपेयी जी कांग्रेस पार्टी को अच्छे से जानते थे। उन्हें अंदाजा था कि ये लोग बिल को गिराना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने इसे आगे बढ़ा दिया था।
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