अमायरा मौत मामला: अदालत ने लिया संज्ञान, सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय भेजा मामला

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अमायरा मौत मामला: अदालत ने लिया संज्ञान, सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय भेजा मामला

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 09:51 PM IST

जयपुर, 28 जुलाई (भाषा) जयपुर की एक अदालत ने पिछले वर्ष एक निजी स्कूल में नौ वर्षीय छात्रा अमायरा की मौत के मामले में पुलिस द्वारा दाखिल आरोप-पत्र का संज्ञान लेते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए बाल मामलों के लिए नामित जिला एवं सत्र न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।

यह मामला जयपुर के मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा चार की छात्रा अमायरा की एक नवंबर, 2025 को हुई मौत से जुड़ा है।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम-10, मेट्रो-प्रथम) भारती पंवार की अदालत ने पुलिस के आरोप-पत्र का संज्ञान लेने के बाद मामले को आगे की कार्यवाही के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय (किशोर न्यायालय) भेज दिया। अदालत की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई।

पीड़िता के परिजनों की ओर से दायर आवेदन में कक्षा अध्यापिका पुनीता शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107 तथा स्कूल की प्राचार्य इंदु दुबे और चेयरमैन सौरभ मोदी के खिलाफ किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 जोड़ने की मांग की गई है।

पुलिस ने अपने आरोप-पत्र में इंदु दुबे, सौरभ मोदी और पुनीता शर्मा के खिलाफ बीएनएस की धारा 106(1) और 238(सी) लगाई है। वहीं, पुनीता शर्मा के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 भी जोड़ी गई है। इसके अलावा, रामू नामक सफाई कर्मचारी के खिलाफ बीएनएस की धारा 238(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि अमायरा की मौत को केवल दुर्घटना या सामान्य लापरवाही का मामला नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था में कथित खामियों, बच्ची के साथ किए गए व्यवहार और घटनास्थल से कथित रूप से साक्ष्य हटाए जाने के आरोपों की निष्पक्ष एवं विस्तृत न्यायिक जांच की मांग की है।

अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा, ‘‘मेरी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे या परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।’’

अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि यह मामला शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, गरिमा तथा संरक्षण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाना न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है और अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की मांग पर अब सक्षम न्यायालय विचार करेगा।

भाषा

बाकोलिया रवि कांत