शासन और हर नीति के केंद्र में लोग होने चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष नौकरशाहों से कहा

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शासन और हर नीति के केंद्र में लोग होने चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष नौकरशाहों से कहा

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 10:17 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 10:17 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को देश के शीर्ष नौकरशाहों से कहा कि वे शासन व्यवस्था में लोगों को केंद्र में रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर नीति और निर्णय आम नागरिकों के हितों और आकांक्षाओं के अनुरूप हो।

भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आह्वान किया कि सरकार के भीतर सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि एकीकृत परिणाम हासिल किए जा सकें।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रगति तेज करने के प्रयासों के तहत वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के कार्य एजेंडे की समीक्षा की।

मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “आज भारत सरकार के सचिवों के साथ बैठक में वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। नागरिक केंद्रित शासन को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक विकसित करने के तरीकों पर जोर दिया। साथ ही प्रमुख क्षेत्रों में युवा उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।”

प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और विभागों में टीम भावना के साथ काम करने की जरूरत पर जोर देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य के साथ काम करने का आग्रह किया।

बयान में कहा गया कि मोदी ने नागरिक केंद्रित शासन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के लोगों को हमेशा शासन के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हर नीति और निर्णय आम नागरिक के हितों और आकांक्षाओं से प्रेरित होना चाहिए।’’

मोदी ने कहा कि भारत बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ स्वदेशी तकनीक विकसित करने को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि भारत को नवाचार, विविधीकरण और क्षमता विस्तार में तेजी लाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी।

सुधारों पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सुधार केवल एक चलन वाला शब्द नहीं है, बल्कि प्रभावी शासन के लिए लगातार जरूरी प्रक्रिया है। उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और संस्थागत दक्षता मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल प्रणालियों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री ने उभरते साइबर खतरों के प्रति सतर्क रहने और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में युवा नवप्रवर्तकों एवं उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

मोदी ने रणनीतिक क्षेत्रों में देश द्वारा की जा रही प्रमुख पहल को लेकर सक्रिय संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भ्रामक सूचनाओं और निराधार आशंकाओं का मुकाबला किया जा सके।

उन्होंने कहा कि उभरते और भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल को तैयार करने के लिए उद्योगों के साथ मिलकर नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील और भविष्य की ओर देखने वाली बनी रहना चाहिए तथा नयी चुनौतियों और अवसरों के अनुसार स्वयं को लगातार बदलते रहना चाहिए।

बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इसमें कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश