झालावाड़ स्कूल दुर्घटना के पीड़ितों के नाम पर एक क्षुद्रग्रह का नाम रखा जायेगा

झालावाड़ स्कूल दुर्घटना के पीड़ितों के नाम पर एक क्षुद्रग्रह का नाम रखा जायेगा

झालावाड़ स्कूल दुर्घटना के पीड़ितों के नाम पर एक क्षुद्रग्रह का नाम रखा जायेगा
Modified Date: January 9, 2026 / 10:05 am IST
Published Date: January 9, 2026 10:05 am IST

कोटा, नौ जनवरी (भाषा) राजस्थान में झालावाड़ जिले के छात्रों ने खोजे गए चार क्षुद्रग्रहों में से एक का नाम जुलाई 2025 में स्कूल की इमारत ढहने की घटना में जान गंवाने वाले सात बच्चों की स्मृति में उनके नाम पर रखने का निर्णय लिया है।

जुलाई 2025 में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव स्थित एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी जबकि 27 अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ऊन्हेल (झालावाड़) के छात्रों ने वर्ष 2020-2021 के दौरान चार क्षुद्रग्रहों की खोज की थी। इन क्षुद्रग्रहों ने अब सूर्य के चारों ओर एक पूरा चक्कर पूरा कर लिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैन-स्टार्स के माध्यम से इन्हें स्थायी संख्याएं आवंटित की गई हैं, जिससे उनकी कक्षाएं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो गई हैं।

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इन क्षुद्रग्रहों की खोज सुगंधा कुमारी, कोमल कुंवर, हर्षिता डांगी और संजय कुमार ने की थी, जो वर्तमान में विभिन्न महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

महात्मा गांधी सरकारी स्कूल, पचपहाड़ (झालावाड़) में पदस्थ डॉ. दिव्येंदु सेन के मार्गदर्शन में छात्रों ने आईएएससी-नासा क्षुद्रग्रह खोज अभियान में भाग लिया था। अब तक 100 से अधिक छात्र इस कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं और सामूहिक रूप से 12 मुख्य-पट्टिका (मेन-बेल्ट) क्षुद्रग्रहों की खोज कर चुके हैं।

डॉ. सेन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग (आईएएससी) से पिछले महीने एक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें कहा गया कि चार में से एक क्रमांकित क्षुद्रग्रह सर्वेक्षण संस्था के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष तीन के नामकरण का प्रस्ताव खोजकर्ता छात्र दे सकते हैं। नामकरण अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि खोजकर्ताओं ने लिखित रूप में अपनी इच्छा जताई है कि वे एक क्षुद्रग्रह का नाम हादसे में मारे गए सात बच्चों की स्मृति में रखना चाहते हैं। प्रस्तावित नाम ‘प्रमिश्का’ है, जो मृत बच्चों—पायल (13), प्रियंका (12), मीना (12), हरिश (11), कुंदन (10), कान्हा (7) और सतीश (8)—के नामों के प्रथम अक्षरों से बनाया गया है। अन्य संक्षिप्त नामों पर भी विचार किया जा रहा है।

डॉ. सेन ने कहा कि क्षुद्रग्रह लाखों वर्षों तक सौरमंडल में बने रहते हैं और एक बार अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (आईएयू) द्वारा नाम स्वीकृत होने के बाद वह वैज्ञानिक साहित्य का स्थायी हिस्सा बन जाता है। अंतिम मंजूरी आईएयू द्वारा दी जाएगी।

इस बीच, झालावाड़ के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि मृत बच्चों के नाम पर क्षुद्रग्रह का नामकरण उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी और विभाग ने इस प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई के लिए सहमति दे दी है।

भाषा मनीषा देवेंद्र

देवेंद्र


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