Vande Bharat: अमेरिका करेगा ईरान पर अटैक! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को दी ये धमकी
Iran-US Tensions: अमेरिका करेगा ईरान पर अटैक! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को दी ये धमकी
Iran-US Tensions | Photo Credit: IBC24 Customize
- ईरान के 31 प्रांतों में विरोध प्रदर्शन
- अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत
- अमेरिका ने ईरानी सरकार को चेतावनी दी
नई दिल्ली: Iran-US Tensions ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। भीषण आर्थिक संकट के बीच देशव्यापी विरोध प्रदर्शन इस्लामिक गणराज्य की नींव को हिला रहे हैं। बढ़ती महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले लगातार गिरती ईरानी मुद्रा रियाल ने जनता के गुस्से को सड़कों पर ला दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सरकार को पूरे देश में इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे। 2022 के बाद यह आंदोलन ईरानी शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।
Iran-US Tensions ईरान के 31 के 31 प्रांत इस वक्त आग की चपेट में हैं। राजधानी तेहरान से लेकर दूरदराज़ के इलाकों तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध की वजह शुरुआत में आर्थिक बदहाली थी, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे तौर पर इस्लामी शासन के खिलाफ जनाक्रोश में बदल चुका है। गिरती रियाल, आसमान छूती महंगाई और रोजगार की कमी ने आम ईरानी की जिंदगी को बदहाल कर दिया है। तेहरान के ग्रांड बाजार से शुरू हुआ विरोध जल्द ही हिंसक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में तब्दील हो गया. प्रदर्शनकारियों ने ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए।
हालात काबू से बाहर होते देख सरकार ने 8 जनवरी से पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं, ताकि प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय रोका जा सके. बावजूद इसके, राजधानी तेहरान के पुनाक, शरियाती स्ट्रीट और सआदत आबाद जैसे इलाकों में भारी भीड़ जमा हुई और सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पें हुईं।
प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग लगा दी, कराज में एक नगरपालिका भवन को निशाना बनाया और कई सरकारी इमारतों, वाहनों, सरकारी मीडिया संस्थानों को फूंक दिया। कई जगहों पर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले का ईरानी झंडा भी लहराया गया।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका है। तेहरान के एक डॉक्टर ने दावा किया है कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में ही 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें ज्यादातर की मौत गोली लगने से हुई।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हो चुकी है। सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें “उनकी जगह बता दी जाएगी”। इसके बाद सुरक्षाबलों ने कई इलाकों में आंसू गैस और गोलियों का इस्तेमाल किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी हुई तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है। वहीं खामेनेई ने इन चेतावनियों को खारिज करते हुए देश में अशांति के लिए विदेशी साजिश को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान में जारी ये आंदोलन अब सिर्फ आर्थिक संकट का विरोध नहीं रह गए हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर इस्लामी शासन के खिलाफ जनता की आवाज बन चुके हैं। इंटरनेट बंद, दमन तेज और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान किस दिशा में जाएगा, ये आने वाले दिनों में साफ होगा।

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