अंकिता भंडारी हत्या मामला: अदालत का दोषियों को अंतरिम राहत देने से इंकार

अंकिता भंडारी हत्या मामला: अदालत का दोषियों को अंतरिम राहत देने से इंकार

अंकिता भंडारी हत्या मामला: अदालत का दोषियों को अंतरिम राहत देने से इंकार
Modified Date: June 30, 2026 / 10:33 pm IST
Published Date: June 30, 2026 10:33 pm IST

नैनीताल, 30 जून (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अंकिता भंडारी हत्या मामले के दोषियों को अंतरिम राहत देने से मंगलवार को इंकार कर दिया।

दोषियों ने निचली अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजाये जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने दोषियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई के बाद उन्हें अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख निर्धारित की।

सजा निलंबित करने और जमानत दिए जाने का अनुरोध करते हुए पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर ने दलील दी कि अंकिता ने आत्महत्या की थी और घटना का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं है।

याचिका का विरोध करते हुए, राज्य और पीड़ित के परिवार ने कहा कि घटना के बाद अहम सबूत नष्ट कर दिए गए थे, जिसमें रिजॉर्ट के कुछ हिस्सों को तोड़ना और सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर के साथ छेड़छाड़ करना शामिल है। यह भी कहा गया कि फोरेंसिक सबूत और व्हाटसऐप चैट उन्हें अपराध से जोड़ते हैं।

कोटद्वार की जिला अदालत ने 30 मई 2025 को मारपीट, हत्या और सबूतों से छेड़छाड़ के लिए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आर्य, भास्कर तथा एक अन्य अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा 47 गवाहों को पेश किया गया था।

आर्य और भास्कर ने उच्च न्यायालय में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए अपील पर सुनवाई के दौरान जमानत देने का अनुरोध किया है।

भाषा सं दीप्ति अमित

अमित


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