Anna Hazare Support Sonam Wangchuk: ‘उनके सब्र की परीक्षा लेना ठीक नहीं’, सोनम वांगचुक के समर्थन में आए अन्ना हजारे, केंद्र सरकार को दे दी ये सलाह

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Anna Hazare Support Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि केंद्र सरकार को शिक्षाविद् सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए।

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  • Publish Date - July 18, 2026 / 07:23 PM IST,
    Updated On - July 18, 2026 / 07:27 PM IST

Anna Hazare Support Sonam Wangchuk/Image Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • सोनम वांगचुक के समर्थन में आए अन्ना हजारे।
  • अन्ना ने कहा- केंद्र को सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए।
  • अन्ना ने कहा- व्यक्ति के सब्र की परीक्षा लेना बिल्कुल ठीक नहीं है।

Anna Hazare Support Sonam Wangchuk: मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को शिक्षाविद् सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए। अन्ना हजारे ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘ सरकार को उनके सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। (उनकी मांगों को लेकर) हां कहें या न, लेकिन बातचीत करने में क्या हर्ज है?’’ वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद शनिवार को एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। लोकपाल कानून को लेकर दिल्ली में हजारे के अनशन ने 2011 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को हिला दिया था।

क्या कहा अन्ना हजारे ने

दिल्ली पुलिस की ओर से सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद अन्ना हजारे ने सरकार को बातचीत की सलाह दी है। (Anna Hazare Support Sonam Wangchuk) उन्होंने कहा कि वांगचुक 20 दिन तक अनशन पर रहे हैं, इसलिए सरकार को उनके सब्र का इम्तिहान नहीं लेना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगें माने या न माने, लेकिन बातचीत जरूर करे।

सरकार को तोड़नी चाहिए अपनी चुप्पी

Anna Hazare Support Sonam Wangchuk: जंतर-मंतर से उन्हें अस्पताल में ले जाने पर अन्ना हजारे ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। चाहे मांगों पर हां कहा जाए या साफ तौर पर ना, लेकिन बातचीत जरूर होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी मुद्दे का समाधान सिर्फ संवाद से ही निकलता है। 20 दिन तक अनशन करने वाले व्यक्ति के सब्र की परीक्षा लेना बिल्कुल ठीक नहीं है। सरकार को अपनी बात भी रखनी चाहिए और सामने वाले की बात भी सुननी चाहिए, तभी समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।

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