बड़े बजट की एक और तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ सेंसर मंजूरी में देरी से अटकी

बड़े बजट की एक और तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ सेंसर मंजूरी में देरी से अटकी

बड़े बजट की एक और तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ सेंसर मंजूरी में देरी से अटकी
Modified Date: January 9, 2026 / 10:25 am IST
Published Date: January 9, 2026 10:25 am IST

चेन्नई, नौ जनवरी (भाषा) पोंगल के दौरान अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज के बाद बड़ी बजट की तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाणपत्र मिलने में देरी के कारण अटक गई है, जिससे तमिल फिल्म जगत में सेंसर प्रक्रिया को लेकर व्यापक चिंता उभरी हैं।

फिल्म जगत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जनवरी 10 को ‘जन नायकन’ के एक दिन बाद रिलीज होने वाली इस फिल्म को बृहस्पतिवार शाम तक बोर्ड से मंजूरी नहीं मिली थी।

सुधा कोंगरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शिवकार्तिकेयन, ‘जयम’ रवि और श्रीलीला मुख्य भूमिकाओं में हैं। 1960 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म सामाजिक यथार्थ और प्रतिरोध जैसे विषयों को दर्शाती है।

 ⁠

फिल्म के प्रचार के तहत हाल ही में यहां वल्लुवर कोट्टम में निर्माताओं द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी में फिल्म के सेट को आम जनता के लिए पुनर्निर्मित किया गया था। यह प्रदर्शनी लोगों ने बेहद पसंद की और इसे एक सप्ताह से अधिक समय के लिए बढ़ाना पड़ा।

प्रमाणन को लेकर बनी अनिश्चितता का असर थिएटर बुकिंग पर पड़ा है। प्रदर्शक, प्रमाणपत्र की पुष्टि होने तक, त्योहारों पर रिलीज होने वाली दोनों फिल्मों के लिए अग्रिम टिकट बिक्री खोलने से परहेज कर रहे हैं।

बृहस्पतिवार शाम तक टिकट बुकिंग मंच बुकमायशो पर चेन्नई में केवल तीन थिएटरों में टिकट बिक्री दिखाई गई, जो सभी शहर के उपनगरीय इलाकों में स्थित हैं।

डॉन पिक्चर्स द्वारा निर्मित इस फिल्म का वितरण रेड जायंट मूवीज़ कर रही है, जिसकी स्थापना तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने की है।

सुधा कोंगरा से संपर्क करने के प्रयास तत्काल सफल नहीं हो सके।

इस बीच, फिल्मकार कार्तिक सुब्बाराज ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बड़े और स्वतंत्र, दोनों तरह के प्रोडक्शन को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे सिनेमा के लिए “कठिन समय” बताया।

बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “अन्य बड़ी बजट की फिल्म ‘पराशक्ति’ के प्रमाणपत्र के मुद्दे के कारण कई केंद्रों में अभी तक बुकिंग शुरू नहीं हो पाई है, जबकि फिल्म परसों रिलीज होने वाली है…।”

सुब्बाराज ने कहा कि मौजूदा सेंसरशिप प्रक्रिया में, खासकर विदेशों में एकसाथ रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों के लिए, “सरलीकरण और लचीलापन” जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतिम समय की अव्यवस्था से बचने के लिए फिल्म टीमों को कम से कम तीन महीने का क्लीयरेंस समय मिलना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी, “अन्यथा, त्योहारों के दौरान बड़ी फिल्मों का टलना अंततः उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा।”

सीबीएफसी या ‘पराशक्ति’ की निर्माण टीम की ओर से फिल्म के प्रमाणन की स्थिति को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

भाषा मनीषा शोभना

शोभना


लेखक के बारे में