बंगाल में गुंडा-रोधी कानून लागू, तृणमूल की ‘गुंडागर्दी’ पर लगाम लगाना मकसद: शुभेंदु

बंगाल में गुंडा-रोधी कानून लागू, तृणमूल की ‘गुंडागर्दी’ पर लगाम लगाना मकसद: शुभेंदु

बंगाल में गुंडा-रोधी कानून लागू, तृणमूल की ‘गुंडागर्दी’ पर लगाम लगाना मकसद: शुभेंदु
Modified Date: July 13, 2026 / 10:38 pm IST
Published Date: July 13, 2026 10:38 pm IST

कोलकाता, 13 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल का गुंडा-रोधी कानून सोमवार को लागू हो गया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे “वामपंथी और तृणमूल के गुंडों” को खत्म करने का जरिया बताया, जबकि विपक्ष और सत्ताधारी खेमे के कुछ लोगों ने चेतावनी दी कि इसकी व्यापक शक्तियों का गलत इस्तेमाल हो सकता है।

माकपा ने दूसरी वामपंथी पार्टियों के साथ मिलकर 1977 से 2011 तक पश्चिम बंगाल पर शासन किया था। इसके बाद ममता बनर्जी की पार्टी ने सत्ता हासिल की और राज्य पर शासन किया। इस साल की शुरुआत में भाजपा ने विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर राज्य में तृणमूल शासन का अंत किया।

पश्चिम बंगाल जन-सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026 सोमवार को लागू हो गया। इसे दो हफ़्ते पहले विधानसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया था। इस कानून से संगठित अपराध, जबरन वसूली, अवैध खनन, साइबर अपराध और सार्वजनिक अव्यवस्था से निपटने के लिए राज्य की शक्तियां काफ़ी बढ़ गई हैं।

अधिकारी ने इस कानून को जरूरी बताते हुए इसे पिछली सरकारों के बाद कानून-व्यवस्था बहाल करने के बड़े राजनीतिक विमर्श के तहत पेश करने की कोशिश की।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह कानून 34 साल के वामपंथी शासन के गुंडों और 15 साल के तृणमूल शासन वाले गुंडों से निपटने के लिए जरूरी था।” उन्होंने यह साफ किया कि इस कानून का मकसद आम राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जमे-जमाए अपराधी-नेता नेटवर्क को खत्म करना था।

इसके सबसे अहम प्रावधानों में से एक प्रशासन को यह अधिकार देता है कि अगर अधिकारियों को लगता है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है या संगठित असामाजिक अपराध करने की तैयारी कर रहा है, तो वे बिना किसी मुकदमे के उसे 12 महीने तक के लिए एहतियातन हिरासत में रखने का आदेश दे सकते हैं।

जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और उपमहानिरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को भी ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार दिया गया है, जिनके तहत आदतन अपराधी माने जाने वाले लोगों को एक साल तक के लिए किसी इलाके या पूरे जिले से बाहर जाने का निर्देश दिया जा सके।

यह कानून अपने दायरे में आने वाले अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाता है, पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार देता है, और संगठित आपराधिक गतिविधियों जैसे कि सिंडिकेट संचालन, जबरन वसूली और भूमि हड़पने के माध्यम से कथित रूप से अर्जित संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की अनुमति देता है।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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