अनुराग ठाकुर ने बीसीसीआई मामले में 2017 के आदेश में संशोधन के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया

अनुराग ठाकुर ने बीसीसीआई मामले में 2017 के आदेश में संशोधन के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया

अनुराग ठाकुर ने बीसीसीआई मामले में 2017 के आदेश में संशोधन के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया
Modified Date: January 12, 2026 / 07:00 pm IST
Published Date: January 12, 2026 7:00 pm IST

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री और ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड’ (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने शीर्ष अदालत के उस पूर्व आदेश में संशोधन के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिसमें उन्हें बीसीसीआई के मामलों से जुड़े रहने से ‘पूरी तरह परहेज’ करने का निर्देश दिया गया है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दो सप्ताह बाद याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई।

ठाकुर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस पटवालिया ने पीठ को बताया कि दो जनवरी, 2017 को उच्चतम न्यायालय ने पूर्व मंत्री को बीसीसीआई के कामकाज से तुरंत ‘पूरी तरह से दूरी बनाने’ का आदेश दिया था और उनके खिलाफ अवमानना ​​और झूठी गवाही के मामले में कार्यवाही शुरू की थी।

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पटवालिया ने कहा, ‘‘वह आदेश मेरी बात सुने बिना पारित किया गया था। हालांकि, इस अदालत ने अवमानना ​​और झूठी गवाही से जुड़ी कार्यवाही रद्द कर दी है। अब, मेरा अनुरोध है कि इस ‘पूरी तरह से परहेज करने’ के निर्देश में संशोधन किया जाए।’’

पीठ ने पटवालिया से कहा कि अदालत दो सप्ताह बाद इस मामले की सुनवाई करेगी और बीसीसीआई से संबंधित बाकी याचिकाओं और आवेदनों पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

अदालत ने मामले में न्यायमित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह को सभी हस्तक्षेप और अंतरिम आवेदनों को मुद्दे के आधार पर अलग-अलग करने और उन्हें तदनुसार अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

उच्चतम न्यायालय ने दो जनवरी, 2017 को ठाकुर के खिलाफ अवमानना ​​और झूठी गवाही के मामले में कार्यवाही शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष शशांक मनोहर को लिखे पत्र के संबंध में झूठा हलफनामा दाखिल किया था।

हालांकि, 14 जुलाई, 2017 को शीर्ष अदालत ने ठाकुर को राहत देते हुए उनके खिलाफ अवमानना ​​और झूठी गवाही की कार्यवाही को रद्द कर दिया था, क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अदालत से बिना शर्त और स्पष्ट माफी मांग ली थी।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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