आतंकवाद से पीड़ित 438 लोगों के परिजनों को नियुक्ति पत्र दिये गए : सिन्हा

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आतंकवाद से पीड़ित 438 लोगों के परिजनों को नियुक्ति पत्र दिये गए : सिन्हा

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  • Publish Date - March 23, 2026 / 07:32 PM IST,
    Updated On - March 23, 2026 / 07:32 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

जम्मू, 23 मार्च (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि 2025 से अब तक आतंकवाद से पीड़ित 438 परिवारों के सदस्यों को नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि यह महज एक आंकड़ा नहीं बल्कि उन परिवारों की ‘बिखरी हुई दुनिया’ को समेटने का प्रयास है जिन्होंने हिंसा में अपने प्रियजनों को खो दिया है।

सिन्हा ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे प्रत्येक मामले उन घरों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां ‘हंसी की जगह सन्नाटा छा गया था’ और उन परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें वर्षों तक खुद का भरण-पोषण करना पड़ा, अक्सर व्यक्तिगत नुकसान के अलावा सामाजिक उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा।

उप राज्यपाल ने सोमवार को आतंकवाद के पीड़ितों के 37 परिजनों और सेवा के दौरान जान गंवाने वाले सरकारी कर्मचारियों के 29 परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे।

उन्होंने कहा, ‘‘अब तक आतंकी हमले से पीड़ित 438 परिवारों के सदस्यों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। यह महज एक संख्या नहीं है ये 438 बिखरी दुनिया हैं।’’

उपराज्यपाल ने आतंकवाद के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आतंकवाद के तंत्र और उसके समर्थकों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लिया।

सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों को आश्वस्त करता हूं कि हम उनके गरिमापूर्ण और सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे। हम उनके प्रति अपने हर कर्तव्य को पूरी गंभीरता से निभाएंगे और तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हर परिवार को न्याय नहीं मिल जाता।’’

उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों के लिए न्याय केवल सजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जख्मों को भरने और गरिमा को बहाल करना भी शामिल है।

सिन्हा ने आरोप लगाया कि दशकों तक आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को हाशिए पर रखा गया, जबकि आतंकी नेटवर्क से जुड़े तत्वों को कथित तौर पर संरक्षण और लाभ मिलते रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां सामाजिक नैतिकता के पतन और कानून, विश्वास और एक न्यायपूर्ण समाज की नींव के कमजोर होने का प्रतीक हैं।

भाषा धीरज नरेश

नरेश

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