नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने शनिवार को कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को मौजूदा सुरक्षा खतरे से निपटने और भविष्य की चुनौतियों का अनुमान लगाने में सक्षम होना चाहिए, तथा ऐसी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए जो उन्हें ‘‘भविष्य के युद्धों को प्रभावी ढंग से लड़ने’’ में सक्षम बनाती हों।
उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में यह भी कहा कि जहां राष्ट्रीय हित शामिल होते हैं, वहां ‘‘हम सैन्य बल या सैन्य शक्ति की प्रधानता देखते हैं’’।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल ने रूस-यूक्रेन के लंबे युद्ध और अमेरिका, इजराइल व ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया संघर्ष के उदाहरण दिए।
जनरल पांडे ने अप्रैल 2022 से जून 2024 तक थलसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कार्य किया।
उनके कार्यकाल में सेना ने उच्च स्तर की युद्ध तत्परता और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की योजनाओं पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान द्वारा दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में किया गया।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हम एक बेहद जटिल दुनिया में रह रहे हैं… न केवल मौजूदा सुरक्षा खतरों से निपटना है, बल्कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का अनुमान भी लगाना है। एक बार अनुमान लगा लेने के बाद, आपको उसी के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आपके पास वे क्षमताएं होनी चाहिए जो आपको भविष्य के युद्धों से प्रभावी ढंग से लड़ने में सक्षम बनाएंगी। इसलिए सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा।’’
भाषा नेत्रपाल जितेंद्र
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