भूस्खलन प्रभावित पुंछ में सेना ने त्वरित कार्रवाई कर अहम संपर्क व्यवस्था बहाल की

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भूस्खलन प्रभावित पुंछ में सेना ने त्वरित कार्रवाई कर अहम संपर्क व्यवस्था बहाल की

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 10:10 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 10:10 PM IST

जम्मू, 21 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में मंगलवार को सेना ने दो त्वरित अभियान चलाकर जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया और एक महत्वपूर्ण पुल की मरम्मत कर दूरदराज के गांवों का संपर्क फिर से स्थापित किया। यह जानकारी रक्षा प्रवक्ता ने दी।

प्रवक्ता के अनुसार, जारन वाली गली में पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय की चारदीवारी ढहकर वहां खड़े कई वाहनों पर गिर गई। इससे जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन बाधित हो गया।

उन्होंने बताया कि व्हाइट नाइट कोर के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया, फंसे हुए वाहनों को बाहर निकाला तथा स्थानीय लोगों की सहायता की।

प्रवक्ता ने कहा कि सेना के समन्वित प्रयासों से राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात जल्द बहाल हो गया और यात्रियों तथा आसपास के लोगों की परेशानी टल गई।

एक अन्य अभियान में, खारी करमारा के पास भारी बारिश और तेज बहाव के कारण एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे स्थानीय संपर्क बाधित हो गया।

उन्होंने बताया कि व्हाइट नाइट कोर के जवानों ने 79 आरसीसी (सीमा सड़क संगठन) और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया। प्रतिकूल मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग को मात्र तीन घंटे में बहाल कर दिया गया जिससे प्रभावित समुदाय का संपर्क फिर से स्थापित हो गया और आवश्यक आवाजाही शुरू हो सकी।

एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए प्रवक्ता ने बताया कि रविवार को दारा सांगला में अचानक आई बाढ़ के कारण लोहे का एक पुल बह गया, जिससे गांव का संपर्क कट गया और लोगों की चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बाधित हो गई।

उन्होंने कहा कि सेना की चिकित्सा टीम अस्थायी रूप से बनाए गए लकड़ी के पुल के सहारे उफनते नाले को पार कर प्रभावित ग्रामीणों तक पहुंची।

प्रवक्ता के अनुसार, चिकित्सा दल ने मौके पर तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की, आपातकालीन प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया, एक घायल नागरिक का उपचार किया तथा महिलाओं, बच्चों और अन्य ग्रामीणों के बीच आवश्यक दवाइयां वितरित कीं।

प्रवक्ता ने कहा कि इन अभियानों ने चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में सेना की तत्परता, पेशेवर दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता को रेखांकित किया।

भाषा रंजन अविनाश

अविनाश