अरुणाचल: सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध के बीच खांडू ने स्थानीय लोगों के साथ संवाद पर जोर दिया

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अरुणाचल: सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध के बीच खांडू ने स्थानीय लोगों के साथ संवाद पर जोर दिया

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 08:13 PM IST

ईटानगर, 29 सितंबर (भाषा) अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को बोलेंग और यिंगकियोंग का दौरा किया और सरकार के तकनीकी मूल्यांकन के साथ आगे बढ़ने के दौरान संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

खांडू ने यिंगकियोंग में ‘‘सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना’’ (एसयूएमपी) के लिए गठित उच्चस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता भी की और सियांग तथा ऊपरी सियांग जिलों में प्रस्तावित प्रारंभिक आकलन रिपोर्ट (पीएफआर) सर्वेक्षण की तैयारियों की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएफआर प्रस्तावित परियोजना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की दिशा में पहला कदम है, जिसके तहत इसकी बुनियादी व्यवहार्यता और संभावित प्रभावों का आकलन किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएफआर के निष्कर्ष आगे की जांच और सही फैसला लेने का आधार बनेंगे, लेकिन इसे परियोजना की अंतिम मंजूरी या इसके निर्माण का अंतिम निर्णय मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।

खांडू ने जोर देकर कहा कि सरकार की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी रहे और इसमें स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं तथा जमीनी हकीकत का पूरा ध्यान रखा जाए।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जनता के विश्वास और भरोसे के बिना इतनी महत्वपूर्ण कोई भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती।’’

खांडू ने कहा, ‘‘हम हर कदम पर आपके साथ रहेंगे, आपकी चिंताओं को दूर करेंगे और अपने काम से आपका विश्वास जीतेंगे।’’

उन्होंने यह भी कहा कि समय हमारे पास कम है और यदि अब कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ऊपरी सियांग जिले के मुख्यालय यिंगकियोंग जाने से पहले खांडू ने सियांग जिले के बोलेंग में अधिकारियों के साथ संवाद किया।

उन्होंने कहा कि बातचीत का रास्ता सबसे महत्वपूर्ण है और उन्होंने सरकारी कर्मचारियों से अपील की कि वे जनजातीय समाज में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों में जागरूकता फैलाएं, जिम्मेदारी की भावना बढ़ाएं और व्यापक जनहित में काम करें।

‘एसयूएमपी’ को लगभग 11,000 मेगावाट की अधिकतम उत्पादन क्षमता वाली एक प्रमुख जलविद्युत और जल-प्रबंधन परियोजना के रूप में परिकल्पित किया गया है।

केंद्र सरकार ने 2008 में इसे ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित किया था, लेकिन पिछले 18 वर्षों के दौरान विभिन्न कारणों से यह शुरू नहीं हो सकी।

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश