अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने पहचान की रक्षा के लिए भाषा, संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने पहचान की रक्षा के लिए भाषा, संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने पहचान की रक्षा के लिए भाषा, संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया
Modified Date: February 15, 2026 / 11:40 am IST
Published Date: February 15, 2026 11:40 am IST

ईटानगर, 15 फरवरी (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने वैश्वीकरण के बढ़ते प्रभाव के बीच स्थानीय संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर देते हुए कहा कि समुदायों को अपनी पहचान की रक्षा की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए।

चांगलांग जिले के मियाओ में शनिवार को ‘शापावंग यांग मनौ पोई’ महोत्सव को संबोधित करते हुए मीन ने कहा कि यह आयोजन केवल नृत्य और उत्सव तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें वे पवित्र अनुष्ठान शामिल हैं जो लोगों को उनके पूर्वजों से जोड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के महोत्सवों को समाज, विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पर चिंतन करने का मंच बनना चाहिए।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आधुनिकता की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक शिक्षा और बाहरी प्रभावों को रोका नहीं जा सकता लेकिन समुदायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपनी मूल पहचान न खोएं।

मीन ने भाषा को पहचान का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा, “हमारी संस्कृति को कोई और संरक्षित नहीं करेगा, हमें अपनी संस्कृति खुद ही बचानी होगी।”

उपमुख्यमंत्री ने स्कूलों में स्थानीय भाषाओं की शिक्षा को मजबूत करने का आह्वान किया। मीन ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करके प्राचीन पांडुलिपियों, परंपराओं, लोक कथाओं और अभिलेखीय सामग्रियों के दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण के महत्व पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

भाषा प्रचेता शोभना

शोभना


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