नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय में नौ जनवरी को अनियंत्रित भीड़ के कारण हुई अव्यवस्था और हंगामे पर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को चिंता जताई।
ईडी द्वारा राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय में की गई तलाशी और जब्ती से संबंधित मामलों की निर्धारित सुनवाई हंगामे के कारण स्थगित करनी पड़ी थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ को बताया कि तृणमूल कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ ने व्हाट्सऐप संदेश प्रसारित किये थे, जिसमें लोगों से अदालत में इकट्ठा होने के लिए कहा गया था।
मेहता ने कहा, ‘‘कृपया इस मामले में जो हुआ उसे देखें। हमने (कलकत्ता) उच्च न्यायालय का रुख किया। यही होता है जब भीड़तंत्र लोकतंत्र की जगह ले लेता है। उच्च न्यायालय में यही चीज हुई।’’
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग अदालत कक्ष में घुस आए और हंगामा किया। उन्होंने बताया कि पीठ ने कहा कि सुनवाई के लिए यह अनुकूल स्थिति नहीं है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘मैंने सत्तारूढ़ पार्टी के विधि विभाग की व्हाट्सऐप चैट रिकॉर्ड पर रखी है। यह घटना स्वतःस्फूर्त नहीं थी, बल्कि पार्टी के विधि प्रकोष्ठ द्वारा उन्हें वहां जाने का निर्देश दिया गया था।’’
इसके बाद पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘सब लोग आइये? जैसे कि यह जंतर-मंतर हो।’’
मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय को जंतर-मंतर में तब्दील कर दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘बसें और वाहन उपलब्ध कराए गए थे।’’
उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को एक याचिका दायर की और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को यह आदेश पारित करना पड़ा कि मामले में पेश होने वाले वकीलों के अलावा किसी को भी अदालत कक्ष में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मेहता ने कहा, ‘‘कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया गया और सुनवाई संतोषजनक नहीं रही। ईडी को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और माइक्रोफोन निरंतर ‘म्यूट’ किया जा रहा था।’’
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जब अपनी दलीलें शुरू कीं, तो पीठ ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय में हुई घटनाएं चिंताजनक हैं।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय में हंगामे के कारण सुनवाई स्थगित किए जाने से हम चिंतित हैं।’’
सिब्बल ने अदालत को आश्वासन दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘कल सुनवाई हुई।’’ उन्होंने कहा कि कोई शोरगुल नहीं होने पर भी ईडी ने कल सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया।
उच्चतम न्यायालय ने जांच में बनर्जी के बाधा डालने संबंधी ईडी के आरोप पर कहा कि यह “बेहद गंभीर” बात है और इसपर विचार करने पर सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में आई-पैक के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर आठ जनवरी को छापा मारने वाले ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी और राज्य पुलिस को छापे की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
भाषा सुभाष प्रशांत
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