अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान में सैन्य शक्ति पर बढ़ती निर्भरता की फलस्तीनी राजदूत ने की आलोचना

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अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान में सैन्य शक्ति पर बढ़ती निर्भरता की फलस्तीनी राजदूत ने की आलोचना

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  • Publish Date - March 4, 2026 / 05:42 PM IST,
    Updated On - March 4, 2026 / 05:42 PM IST

नयी दिल्ली, चार मार्च (भाषा) भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम अबू शावेश ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान में सैन्य शक्ति पर बढ़ती निर्भरता की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘जंगल का कानून’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे केवल उन्हीं देशों को लाभ होता है जिनके पास अत्याधुनिक हथियार हैं, जबकि कमजोर व निहत्थे देशों का भविष्य असुरक्षित हो जाता है।

अबू शावेश ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में प्रमुख शक्तियों के उन बयानों पर गहरी चिंता जताई, जिनसे संकेत मिलता है कि वार्ता की गुंजाइश अब समाप्त हो चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई कहता है कि बातचीत का समय समाप्त हो गया है, तो इसका मतलब है कि अब वह ताकत और हथियारों का सहारा लेगा। यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।”

उन्होंने सैन्य शक्ति पर बढ़ती निर्भरता की आलोचना करते हुए इसे “जंगल का कानून” बताया। उनका कहना था कि इससे केवल ज्यादा ताकतवर हथियार रखने वाले देशों को फायदा होता है, जबकि कमजोर और निहत्थे देशों विशेषकर ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

उन्होंने बताया कि गाजा संघर्ष की शुरुआत में ही इजराइल के पास व्यापक विनाश के बिना बंधकों को छुड़ाने के अवसर थे लेकिन उसने लंबे समय तक चलने वाली सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुना।

अबू शावेश ने कहा, “ईरान-अमेरिका युद्ध का असर दीर्घकाल में सिर्फ फलस्तीनियों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। लेकिन फलस्तीन के मुद्दे की बात करें, तो इस समय सभी की निगाहें ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच हो रही घटनाओं पर टिकी हैं। हर कोई फलस्तीन के सवाल से या तो पूरी तरह या आंशिक रूप से ध्यान हटा रहा है।”

उन्होंने इजराइल की सेना द्वारा गाजा में चलाए जा रहे सैन्य अभियान को, जो तेज़ होने के बाद अब 880 दिनों से भी आगे बढ़ चुका है, “विनाशकारी नरसंहारक युद्ध” बताया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध बिना रुके जारी है और इस पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी भी पहले की तुलना में कम हो गई है।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश