‘अष्टलक्ष्मी’ कारीगरों ने तैयार किया गणतंत्र दिवस के ‘जलपान कार्यक्रम’ समारोह का निमंत्रण पत्र

‘अष्टलक्ष्मी’ कारीगरों ने तैयार किया गणतंत्र दिवस के ‘जलपान कार्यक्रम’ समारोह का निमंत्रण पत्र

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 12:27 AM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 12:27 AM IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट ‘अष्टलक्ष्मी’ परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला, अष्टकोणीय बांस की बुनाई के पैटर्न में बना एक दीवार पर टांगने वाला स्क्रॉल, गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित ‘जलपान कार्यक्रम’ स्वागत समारोह के लिए हस्तनिर्मित निमंत्रण कार्ड का हिस्सा है।

यह पत्रक कलात्मक रूप से विशेष तौर पर डिजाइन किए गए निमंत्रण बॉक्स के अंदर रखा गया है, जिसमें बुनी हुई बांस की चटाई का उपयोग किया गया है, जिसे रंगे हुए सूती धागों से ताने पर और महीन बांस की पट्टियों से बाने पर करघे पर बनाया गया है। यह तकनीक त्रिपुरा राज्य में आमतौर पर उपयोग की जाती है।

निमंत्रण पत्र के कवर और बॉक्स पर बने सजावटी डिज़ाइन असमिया पांडुलिपि चित्रकला शैली से प्रेरित हैं, जबकि आमंत्रण के नीचे लगे कपड़े के पैनल पर बने रूपांकन भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की वनस्पति और जीव-जंतुओं को दर्शाते हैं।

इसमें कहा गया है, ‘इसे गणतंत्र दिवस 2026 के समारोहों में आपकी भागीदारी के बाद भी लंबे समय तक आपकी दीवारों की शोभा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की जीवंत विरासत और कलात्मक परंपराओं का एक सुंदर चित्रण है।’

26 जनवरी 2026 को हमारे 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति भवन देश भर से आए सम्मानित अतिथियों का स्वागत कर रहा है, और ‘हम आपको भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं’। यह निमंत्रण कार्ड अहमदाबाद के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान द्वारा तैयार किया गया है।

एनआईडी के निदेशक अशोक मंडल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यह निमंत्रण कार्ड अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा सहित आठ पूर्वोत्तर राज्यों के असाधारण रूप से कुशल कारीगरों द्वारा बनाई गई एक उत्कृष्ट कृति है।

उन्होंने कहा, ‘निमंत्रण कार्ड बनाने के लिए अष्टलक्ष्मी राज्य के लगभग 100 कारीगरों को हमारे परिसर में आमंत्रित किया गया था। इसे तैयार करने में लगभग 45 दिन लगे और यह काम बिना किसी मशीन के किया गया। यह पूरी तरह से हाथ से बनाया गया है।’

मंडल ने कहा कि निमंत्रण कार्ड के निर्माण में अधिकतर महिला कारीगरों का योगदान रहा है, जो भारत की 5,000 साल पुरानी सभ्यता को उजागर करता है।

भाषा तान्या प्रशांत

प्रशांत