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नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि नई प्रौद्योगिकियों ने काम करने की क्षमता तो बढ़ाई है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से गलत जानकारी, साइबर अपराध और इससे होने वाली सामाजिक गड़बड़ियों जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने दुनिया भर में लोकतंत्रों के सामने आने वाले इस खतरे से निपटने के लिए प्रभावी समाधान की मांग की।
बिरला ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व ऐसे समय में वैश्विक चुनौतियों का निर्णायक समाधान दे रहा है, जब दुनिया नेतृत्व के लिए उनकी ओर देख रही है।
संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों की संसद के स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए, बिरला ने कहा कि भारत की सात दशक से अधिक लंबी संसदीय यात्रा में, लोगों पर केंद्रित नीतियों और कल्याण केंद्रित कानूनों के जरिए लोकतंत्र मजबूत हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश की उपस्थिति में उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव से गुजर रही है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सोशल मीडिया ने क्षमता बढ़ाई है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का असर बढ़ाया है।
बिरला ने कहा, ‘‘हालांकि, उनके दुरुपयोग ने भी गंभीर चुनौतियां पेश की हैं जिनमें गलत जानकारी, साइबर अपराध और सामाजिक विभाजन शामिल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि इन चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करें और उचित समाधान खोजें।’’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नैतिकतापूर्ण एआई और प्रामाणिक एवं जवाबदेह सोशल मीडिया आज के समय की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि इस सम्मेलन में इस जरूरी वैश्विक मुद्दे पर गहराई से चर्चा होगी और ठोस नीतिगत निर्णय लिये जाएंगे ताकि हम लोकतांत्रिक संस्थाओं में एआई और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल के लिए एक रोडमैप बना सकें।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तटस्थ और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था ने सभी पात्र नागरिकों के लिए भागीदारी वाला लोकतंत्र सुनिश्चित किया है।
बिरला ने कहा कि संसद और सरकार के सामूहिक प्रयासों से कई (आज तक 1500 से अधिक) अवांछित और पुराने कानूनों को रद्द किया गया है और जन कल्याण पर केंद्रित नए कानून बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे कानूनों और नीतियों को लागू करने से भारत को एक आत्मनिर्भर और विकसित देश बनाने में मदद मिलती है।
भाषा वैभव मनीषा
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