गुवाहाटी, 12 अप्रैल (भाषा) असम जातीय परिषद (एजेपी) ने हाल में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में गुवाहाटी सेंट्रल से पार्टी के उम्मीदवार कुंकी चौधरी को पुलिस द्वारा समन किये जाने को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) निर्वाचन क्षेत्र में अपने खिलाफ जनादेश को देख कर घबरा गई है।
चुनाव संबंधी मामले में समन मिलने के बाद चौधरी सुबह पानबाजार पुलिस थाना पहुंचीं। उन्हें शनिवार को नोटिस देकर रविवार पूर्वाह्न 11 बजे से पहले पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था और ऐसा नहीं करने पर उनकी गिरफ्तारी की बात कही गई थी।
भाजपा कार्यकर्ता नबा कुमार लखकर ने नौ अप्रैल को मतदान के दिन चौधरी और उनके चुनाव प्रचार अभियान प्रबंधक संदीप यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। कुमार ने आरोप लगाया गया था कि दोनों ने आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन किया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनावों के संचालन में बाधा डाली।
अधिवक्ता शांतनु बोरठाकुर ने पुलिस थाना के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्राथमिकी में लगाए गए सभी आरोप जमानती हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। वास्तव में, आरोप बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। एक मामला दर्ज किया गया है और इतने कड़े शब्दों में समन केवल परेशान करने के लिए जारी किया गया है।’’
उन्होंने सवाल किया कि अभी आदर्श आचार संहिता लागू है, और जब मुख्य सचिव सरकार चला रहे हैं, तो मुख्यमंत्री कथित तौर पर यह कैसे कह सकते हैं कि उन्होंने पुलिस भेजी थी?
बोरठाकुर ने कहा, ‘‘कुंकी ने चुनाव लड़ा और पूरे राज्य के लिए एक विमर्श तैयार किया, जो भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। इसीलिए राजनीति से प्रेरित होकर यह मामला दर्ज किया गया है।’’
उन्होंने पुलिस से यह भी सवाल किया कि चौधरी द्वारा कथित तौर पर भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के सदस्यों द्वारा फैलाए गए ‘डीप फेक’ वीडियो के संबंध में दर्ज कराई गई शिकायत का क्या हुआ।
एजेपी से पहली बार चुनाव लड़ रही चौधरी उस समय विवाद में आ गईं, जब मुख्यमंत्री शर्मा ने कथित तौर पर ‘बीफ’ के सेवन को लेकर उनके माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। हालांकि, चौधरी ने इन हमलों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। वह गुवाहाटी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
नवीनतम घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए, एजेपी के अध्यक्ष लुरिंज्योति गोगोई ने कहा कि चौधरी को तलब करना ‘‘चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल किसी उम्मीदवार पर प्रशासनिक दबाव नहीं है, बल्कि यह असम में भाजपा द्वारा लोकतंत्र के दमन का ज्वलंत उदाहरण है। हिमंत विश्व शर्मा और भाजपा ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक खतरनाक संकेत है।’’
गोगोई ने आरोप लगाया कि जब सत्तारूढ़ दल को सत्ता खोने का डर होता है, जब उसे यकीन हो जाता है कि जनता का वोट उसके खिलाफ गया है, तो ‘‘भाजपा जैसी फासीवादी पार्टियां’’ सत्ता को अपने कब्जे में रखने के लिए कुटिल रास्तों का सहारा लेती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा सवाल यह है कि कुंकी चौधरी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद डीप-फेक वीडियो प्रसारित करने वाले भाजपा समर्थकों को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है? असम पुलिस पक्षपातपूर्ण तरीके से व्यवहार क्यों कर रही है?’’
गोगोई ने आरोप लगाया कि गुवाहाटी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में एजेपी उम्मीदवार के उभरने और जीत से भयभीत भाजपा ने अब धमकी की राजनीति का सहारा लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह भी उतना ही सच है कि धमकियों से सच्चाई हमेशा के लिए नहीं छिप सकती। हम कुंकी चौधरी जैसी साहसी युवतियों को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि आप अकेली नहीं हैं। असम में हजारों लोकतांत्रिक सोच वाले लोग कुंकी के साथ हैं। ये धमकियां असम जातीय परिषद के संघर्ष को और मजबूत करेंगी।’’
भाषा धीरज सुभाष
सुभाष