असम के अभयारण्य में तरह-तरह की तितलियों का बसेरा, नयी किताब में किया गया 281 प्रजातियों का जिक्र

असम के अभयारण्य में तरह-तरह की तितलियों का बसेरा, नयी किताब में किया गया 281 प्रजातियों का जिक्र

असम के अभयारण्य में तरह-तरह की तितलियों का बसेरा, नयी किताब में किया गया 281 प्रजातियों का जिक्र
Modified Date: July 19, 2026 / 03:44 pm IST
Published Date: July 19, 2026 3:44 pm IST

(जाफरी मुदस्सिर नोफिल)

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) असम का होलोंगापार अभयारण्य राज्य में तितलियों के सबसे समृद्ध बसेरों में भी शामिल है, जहां कई दुर्लभ तितलियां पाई जाती हैं। यह जानकारी एक नयी किताब में दी गई है।

प्रकृतिविद और वन्यजीव फोटोग्राफर सारंगापाणि नियोग ने अपनी किताब ‘बटरफ्लाइज ऑफ गिब्बन वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी’ में असम के जोरहाट जिले में स्थित इस अभयारण्य में देखी गईं तितलियों की 281 प्रजातियों का दस्तावेज तैयार किया है।

इनमें से कई तितलियां बहुत दुर्लभ हैं और आसानी से दिखाई नहीं देतीं। इसलिए तितलियों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ इन्हें ‘ड्रीम बटरफ्लाई’ मानते हैं। नियोग के अनुसार, असम फॉरेस्ट बॉब (स्कोबुरा पैरावूलेटी), रेड-वेन्ड लांसर (पाइरोन्यूरा निआसाना) और येलो-वेन्ड लांसर (पाइरोन्यूरा लैटोइया) जैसी दुर्लभ प्रजातियां होलोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य में पाई जाती हैं।

उन्होंने बताया कि इस अभयारण्य में कई दूसरी दुर्लभ तितलियां भी रहती हैं, जो जंगलों पर निर्भर होती हैं।

नियोग के अनुसार, यहां का प्राकृतिक वातावरण तितलियों के रहने के लिए बहुत अनुकूल है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘यहां विकसित वन क्षेत्र है। ऊपरी हिस्से में ऊंचे होलोंग के पेड़ हैं, जबकि नीचे घनी झाड़ियां और जड़ी-बूटियां हैं। इस तरह की वनस्पति तितलियों की अलग-अलग प्रजातियों के लिए उपयुक्त छोटे-छोटे ठिकाने तैयार करती है।’

उन्होंने कहा, ‘यहां पेड़, झाड़ियां, बेलें, घास और कई तरह के पौधे पाए जाते हैं। ये पौधे तितलियों की इल्ली के लिए भोजन और बड़ी तितलियों के लिए फूलों का रस उपलब्ध कराते हैं। जंगल की छायादार पगडंडियां, धूपदार स्थान, छोटी जलधाराएं और गीली मिट्टी वाली जगहें कई तरह की तितलियों को आकर्षित करती हैं। इसी कारण यह अभयारण्य तितलियां देखने के लिए बहुत अच्छी जगह है।”

उन्होंने बताया कि हालांकि यह अभयारण्य केवल 20.98 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, लेकिन यहां वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन समेत स्तनधारियों की सात प्रजातियां, एशियाई हाथी, तेंदुआ, लेपर्ड कैट, फिशिंग कैट, सिवेट, जंगली सूअर, बार्किंग डियर, पैंगोलिन, कई प्रकार के सरीसृप, पक्षी, गिलहरियां और असंख्य बिना रीढ़ वाले जीव पाए जाते हैं।

नियोग ने कहा कि तितलियां देखने के लिए बहुत आसानी से इस अभ्यारण्य पहुंचा जा सकता है।

उन्होंने कहा, “पर्यटक, शोधकर्ता, फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी तितलियों को उनके प्राकृतिक स्थान पर आसानी से देख सकते हैं और उनकी तस्वीरें ले सकते हैं, बिना उन्हें ज्यादा परेशान किए।”

नियोग की 321 पृष्ठवासी यह पुस्तक फोटो म्यूजिंग्स कलर लैब द्वारा प्रकाशित की गई है।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप


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