आतिशी वीडियो विवाद: दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस को जवाब दाखिल करने के लिए तीन और दिन का समय दिया

आतिशी वीडियो विवाद: दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस को जवाब दाखिल करने के लिए तीन और दिन का समय दिया

आतिशी वीडियो विवाद: दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस को जवाब दाखिल करने के लिए तीन और दिन का समय दिया
Modified Date: January 13, 2026 / 08:21 pm IST
Published Date: January 13, 2026 8:21 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा के वीडियो क्लिप का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के संबंध में पंजाब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन अतिरिक्त दिन दिए हैं।

पिछले सप्ताह पंजाब के डीजीपी, विशेष डीजीपी (साइबर अपराध) और जालंधर पुलिस आयुक्त को ‘दिल्ली विधानसभा के विशेषाधिकारों के उल्लंघन’ के लिए नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें उनसे 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया था।

विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि अधिकारियों ने विधानसभा से अपने जवाब प्रस्तुत करने के लिए 10 दिन का समय देने का अनुरोध किया है।

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विधानसभा की वीडियो रिकॉर्डिंग का एक क्लिप मिश्रा और कई भाजपा विधायकों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विपक्ष की नेता आतिशी ने छह जनवरी को सदन में हुई बहस के बाद गुरु तेग बहादुर का अपमान किया था।

यह बहस पिछले नवंबर में नौवें सिख गुरु की शहादत की 350वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम पर आधारित थी।

विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘पंजाब पुलिस ने दस दिन का समय मांगा है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने उन्हें 15 जनवरी तक पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए केवल तीन दिन का समय दिया है।’

मिश्रा और अन्य के खिलाफ जालंधर पुलिस आयुक्तालय ने आतिशी का एक ‘संपादित और छेड़छाड़ किया हुआ’ वीडियो अपलोड करने और प्रसारित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवाद सामने आते ही आतिशी और अन्य नेताओं ने दावा किया कि वीडियो के साथ भाजपा द्वारा छेड़छाड़ की गई थी।

गुप्ता ने कहा कि पंजाब पुलिस का दावा है कि प्राथमिकी दर्ज करने और वीडियो क्लिप की फोरेंसिक जांच कुछ ही घंटों के भीतर कर ली गई थी, लेकिन उन्होंने विधानसभा के नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा है।

उन्होंने टिप्पणी की, ‘इससे जांच एजेंसी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।’

उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है और सभी मूल वीडियो और दस्तावेज विधानसभा की संपत्ति हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार ने वीडियो रिकॉर्डिंग क्लिप का इस्तेमाल करने की अनुमति लेने के लिए दिल्ली विधानसभा से संपर्क किए बिना ही फोरेंसिक जांच कैसे शुरू कर दी।

उन्होंने बताया कि यह सब तब हुआ जब विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी की मांग के अनुसार अध्यक्ष ने आठ जनवरी को ही वीडियो क्लिप की फोरेंसिक जांच का आदेश दिया था।

गुप्ता ने कहा कि घटनाओं का यह क्रम तथ्यों को स्पष्ट करने के उद्देश्य से नहीं बल्कि ‘भ्रम पैदा करने और जनता को गुमराह करने’ के उद्देश्य से प्रतीत होता है, क्योंकि लोगों की भावनाएं पहले से ही आहत थीं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस अधिकारियों द्वारा मांगे गए 10 दिनों के समय को मामले में देरी करने की रणनीति माना है, और इसलिए केवल तीन अतिरिक्त दिन ही दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस को 15 जनवरी तक सभी प्रासंगिक तथ्यों और स्पष्टीकरणों सहित एक पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

भाषा तान्या प्रशांत

प्रशांत


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