नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता और पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी की हत्या के आरोपी आकाशदीप करज सिंह को दी गई जमानत में हस्तक्षेप करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति जे. बी. परदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने दिवंगत राकांपा नेता की पत्नी शहजीन जियाउद्दीन सिद्दीकी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के 9 फरवरी के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
उच्च न्यायालय ने दिवंगत नेता की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन से कहा, ‘‘यह सोच-विचार कर पारित किया गया फैसला है। इस व्यक्ति का उक्त अपराध से कोई संबंध नहीं है।’’
रामकृष्णन ने आरोप लगाया कि सिंह के संबंध लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से थे, जो अभियोजन पक्ष के अनुसार, सिद्दीकी की हत्या से जुड़ा हुआ था।
हालांकि, पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर गौर कर चुका है और सिंह की संलिप्तता साबित करने के लिए इसे अपर्याप्त पाया है।
महाराष्ट्र सरकार के वकील ने जब पीठ को बताया कि वे भी जमानत को चुनौती देंगे, तो पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘अब चूंकि मृतक की पत्नी हमारे सामने मौजूद है, इसलिए राज्य सरकार भी नींद से जाग गई है।’’
बंबई उच्च न्यायालय ने नौ फरवरी को सिंह को जमानत दी थी, जिससे वह इस मामले में राहत पाने वाला पहला व्यक्ति बन गया।
अदालत ने पंजाब निवासी सिंह को एक लाख रुपये की जमानत पर रिहा कर दिया और निर्देश दिया कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक वह मुंबई से बाहर न जाए।
सिद्दीकी (66) की 12 अक्टूबर 2024 की रात को बांद्रा ईस्ट इलाके में उनके बेटे जीशान के कार्यालय के बाहर तीन लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
सिंह (22) को नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अनमोल बिश्नोई ने गिरोह का भय और दबदबा कायम करने के लिए सिद्दीकी की हत्या की साजिश रची थी।
पुलिस ने इस मामले में 26 लोगों को गिरफ्तार किया है और उन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया है। वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
भाषा सुभाष रंजन
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