बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज की नैहाटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज की नैहाटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज की नैहाटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना
Modified Date: May 14, 2026 / 01:54 pm IST
Published Date: May 14, 2026 1:54 pm IST

कोलकाता, 14 मई (भाषा) नैहाटी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने बुधवार को कहा कि उनकी योजना इस महान उपन्यासकार के जन्मस्थान को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है, जहां लोग आकर उनके पैतृक घर को देख सकें।

चट्टोपाध्याय का जन्म 1838 में वर्तमान उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी कस्बे के पास स्थित काठालपाड़ा गांव में हुआ था।

भाजपा के टिकट पर नैहाटी विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले चटर्जी ने बुधवार को विधायक पद की शपथ ली। उन्होंने चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थामा था।

शपथ ग्रहण के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में चटर्जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को ‘वंदे मातरम्’ को ‘‘वास्तविक सम्मान’’ देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पहले सरकारी कार्यक्रमों में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में पूर्ण रूप से नहीं गाया जाता था।

उन्होंने पूर्व राज्य और केंद्र सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने चट्टोपाध्याय के आवास के लिए ‘‘उसे अधिग्रहित कर विरासत भवन घोषित करने’’ के अलावा कुछ नहीं किया।

विधायक ने कहा कि चट्टोपाध्याय के पैतृक आवास को पर्यटकों के सामने उचित तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण यह अब तक काफी उपेक्षित बना हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि केंद्र सरकार के पास नैहाटी को बंकिम चंद्र की स्मृतियों से जुड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की व्यापक योजनाएं हैं, जहां उनकी बहुआयामी प्रतिभा, राष्ट्रवादी विचारधारा और साहित्यिक कृतियों को देशी और विदेशी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।’’

चटर्जी ने कहा कि नैहाटी के निवासी और चट्टोपाध्याय के वंशज होने के नाते उनके पास ‘‘पूरे इलाके के विकास के लिए कई नए सुझाव’’ हैं।

उन्होंने कहा कि नैहाटी को समग्र पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना के तहत वहां मौजूद एक बड़ी लेकिन अनुपयोगी झील को साफ कर मत्स्य परियोजना शुरू की जा सकती है। झील के पास एक रिसॉर्ट बनाया जा सकता है और उसे ‘‘डेस्टिनेशन वेडिंग’’ स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

‘‘वंदे मातरम्’’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 या 1876 में की थी। बाद में इसे उनके 1882 में प्रकाशित उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया।

चटर्जी ने कहा कि हालांकि यह कहा जाता है कि राष्ट्रीय गीत की रचना चिनसुरा में हुई थी, लेकिन नैहाटी ने भी इसकी रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

हुगली जिले का चिनसुरा और नैहाटी, दोनों हुगली नदी के दो किनारों पर स्थित हैं।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा


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