नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने पिछले पांच वित्त वर्ष में 1.42 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी दी और इस दौरान 6,389 करोड़ रुपये वसूल किए गए।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक से जानकारी मिली है कि वह जानबूझकर चूक करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़ी जानकारी नहीं रखता है।
हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 मार्च, 2026 तक, जानबूझकर चूक करने वाले 15,577 लोगों के खिलाफ वसूली के लिए मुकदमे दायर किए गए थे और 10,894 मामलों में संबंधित कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
इसके अलावा, 7,173 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गईं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 31 मार्च, 2026 तक जानबूझकर चूक करने वालों से कुल 52,360 करोड़ रुपये वसूल किए हैं।
चौधरी ने कहा कि रिजर्व बैंक की जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वित्त वर्ष में वाणिज्यिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 1,42,112 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
वाणिज्यिक बैंकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, लघु वित्त बैंक, पेमेंट बैंक और लोकल एरिया बैंक शामिल हैं।
चौधरी ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि वित्त वर्ष 2026 में रिकवरी एजेंसियों के संबंध में बैंकों के खिलाफ 18,021 शिकायतें मिलीं, जो पिछले साल की 8,623 शिकायतों से दोगुनी से भी अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि कर्ज लेने वाले लोगों को जबरदस्ती वसूली से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों और जवाबदेही को मजबूत करने के मकसद से रिजर्व बैंक ने 28 नवंबर, 2025 को एक अधिसूचना के जरिये बैंकों को निर्देश दिया है कि वे लोगों को अनुचित तरीके से परेशान नहीं करें और रिकवरी एजेंट रखने के लिए उचित प्रक्रिया अपनाएं।
भाषा अविनाश सुरेश
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