बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने वीएलईओ उपग्रह मिशन के लिए कोरिया की टेलीपिक्स के साथ एमओयू किया

बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने वीएलईओ उपग्रह मिशन के लिए कोरिया की टेलीपिक्स के साथ एमओयू किया

बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने वीएलईओ उपग्रह मिशन के लिए कोरिया की टेलीपिक्स के साथ एमओयू किया
Modified Date: May 29, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: May 29, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) बेंगलुरु स्थित बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने पृथ्वी की अत्यंत निचली कक्षा (वेरी लो अर्थ ऑर्बिट-वीएलईओ) उपग्रह मिशन के लिए दक्षिण कोरिया की अंतरिक्ष कृत्रिम मेधा (एआई) समाधान कंपनी ‘टेलीपिक्स’ के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

एमओयू के तहत ‘टेलीपिक्स’ अपने हाई-रिजॉल्यूशन और व्यापक क्षेत्र को कवर करने वाले ऑप्टिकल पेलोड ‘शुएट’ को ‘बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस’ के वीएलईओ उपग्रह मंच के साथ जोड़ेगी।

उपग्रह मंच किसी उपग्रह का वह हिस्सा होता है जो पेलोड को ऊर्जा और संचार जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराता है तथा मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करता है।

‘बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रोहन एम. गणपति ने एक बयान में कहा, ‘‘हमें टेलीपिक्स के साथ साझेदारी कर खुशी हो रही है। उनकी व्यापक क्षेत्र को कवर करने वाली अभिनव ऑप्टिकल पेलोड तकनीक वीएलईओ मिशन के लिए बेहद उपयुक्त है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआती प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन के लिए छोटा और कम घर्षण वाला उपग्रह पर्याप्त हो सकता है, लेकिन वीएलईओ में उपयोगी पेलोड इस्तेमाल करने और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उपग्रह समूह विकसित करने के लिए बड़े उपग्रह मंचों की जरूरत होगी। इसके लिए प्रणोदन प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण प्रगति भी आवश्यक होगी।’’

वीएलईओ उपग्रह पृथ्वी से लगभग 150 से 250 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करते हैं, जो पारंपरिक ‘पृथ्वी की निचली कक्षा’ (एलईओ) उपग्रहों की तुलना में कम है। पृथ्वी के अधिक करीब होने के कारण ये कहीं अधिक हाई-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें लेने में सक्षम होते हैं।

हालांकि, वीएलईओ का वातावरण अधिक घर्षण पैदा करता है, जिसके कारण उपग्रहों को अपने इंजनों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन साथ ले जाना पड़ता है।

‘बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस’ के अनुसार इस समस्या से निपटने के लिए उसका उपग्रह मंच ‘एयर-ब्रीदिंग इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम’ से संचालित है। यह प्रणाली वातावरण से वायु कणों को एकत्र कर उन्हें ईंधन के रूप में इस्तेमाल करती है।

‘बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस’ और ‘टेलीपिक्स’ का लक्ष्य 2028 में इस मिशन को प्रक्षेपित करना है।

भाषा खारी रंजन

रंजन


लेखक के बारे में