बंगाल चुनाव: भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की सूची जारी की, भवानीपुर में ममता के खिलाफ शुभेंदु को उतारा

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बंगाल चुनाव: भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की सूची जारी की, भवानीपुर में ममता के खिलाफ शुभेंदु को उतारा

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 09:32 PM IST

नयी दिल्ली/ कोलकाता, 16 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को 144 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की।

पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट कोलकाता के भवानीपुर से नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को चुनाव मैदान में उतारा है। शुभेंदु अपनी मौजूदा सीट नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ेंगे।

दिल्ली में भाजपा द्वारा की गई घोषणा से संकेत मिलता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी के इर्द-गिर्द चुनावी विमर्श को गढ़ने का प्रयास करेगी। वह चुनाव से पहले अपने मौजूदा विधायकों को काफी हद तक बरकरार रख रही है तथा अपनी सामाजिक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए विभिन्न व्यावसायिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को शामिल कर रही है।

राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे।

भाजपा की पहली सूची में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों से शुभेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी को सबसे महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, जो बंगाल में भाजपा के प्रमुख जमीनी कमांडर के रूप में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है।

नंदीग्राम का इस मायने में राजनीतिक महत्व है कि 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का यह केंद्र था और इसी आंदोलन ने बनर्जी के सत्ता में आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन 2021 में यह सबसे नाटकीय चुनावी लड़ाइयों का भी तब गवाह बना जब अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनर्जी को लगभग 1,900 मतों से हरा दिया।

उधर, भवानीपुर को बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। वह 2021 में इस सीट से 58000 से अधिक मतों के अंतर से उपचुनाव के बाद विधानसभा लौटी थीं।

भाजपा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अधिकारी ने कहा, ‘‘मैं दोनों सीट से जीत दर्ज करूंगा और ममता बनर्जी को फिर से हराऊंगा।’’

उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को उसके कथित गढ़ों में भी चुनौती दे सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय भाजपा की तटीय बंगाल और जंगल महल क्षेत्र में अधिकारी के संगठनात्मक नेटवर्क पर निर्भरता का भी संकेत देता है, जहां उनका काफी प्रभाव माना जाता है।

कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, ‘‘भाजपा स्पष्ट रूप से ममता बनाम शुभेंदु के मुद्दे को लेकर चुनाव को व्यक्तिगत रंग देने की कोशिश कर रही है। भवानीपुर से उन्हें मैदान में उतारकर पार्टी प्रतीकात्मक रूप से मुख्यमंत्री को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देना चाहती है।’’

भाजपा की पहली सूची में 41 मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट दिया गया है। इनमें आसनसोल दक्षिण से अग्निमित्र पॉल, साल्टोरा से चंदना बाउरी और डबग्राम-फुलबाड़ी से शिखा चटर्जी शामिल हैं।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष एक बार फिर खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ेंगे, जबकि पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता को दक्षिण कोलकाता की रासबिहारी सीट से मैदान में उतारा गया है।

केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा घोषित पहली सूची में दो पूर्व सांसद और तीन पूर्व विधायक हैं। पार्टी ने 11 महिलाओं को भी टिकट दिया है।

भाजपा ने युवाओं पर भरोसा जताते हुए 36 सीट पर 40 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसी प्रकार, 72 उम्मीदवारों की उम्र 41 से 55 वर्ष के बीच है जबकि 32 उम्मीदवार 56 से 70 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। चार उम्मीदवार 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक यह सूची सामाजिक विविधता को दर्शाने का एक सुनियोजित प्रयास है, जिसमें भाजपा ने विभिन्न व्यावसायिक पृष्ठभूमियों से आने वाले उम्मीदवारों को प्रमुखता दी है। पार्टी के 144 उम्मीदवारों में 57 शिक्षण, कानून, चिकित्सा, सामाजिक कार्य और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों से हैं।

पार्टी ने सबसे अधिक 23 शिक्षकों को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों, पत्रकारों और अभिनेता रुद्रनील घोष जैसे सांस्कृतिक हस्तियों को भी भाजपा उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा को मोयना से दोबारा मौका दिया गया है।

वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार से संबंधित सौमित्र चट्टोपाध्याय को नैहाटी से भाजपा उम्मीदवार बनाया गया है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘यह सूची जमीनी स्तर के प्रतिनिधित्व और सामाजिक विविधता को दर्शाती है। कई उम्मीदवारों का अपने-अपने पेशे में जनता के साथ मजबूत जुड़ाव है।’’

भाजपा द्वारा 41 मौजूदा विधायकों और तीन पूर्व विधायकों को टिकट दिये जाने से संकेत मिलता है कि वह बड़े पैमाने पर फेरबदल करने के बजाय मौजूदा राजनीतिक नेटवर्क पर भरोसा कर रही है।

भाजपा की यह सूची मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चल रही तीव्र राजनीतिक बहस के बीच आई है। इस प्रक्रिया से कई निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नामों को हटाए जाने के बाद विवाद पैदा हो गया है।

अकेले भवानीपुर में ही मतदाता सूची से 47,000 से अधिक नाम हटाए गए हैं, जबकि 14,000 से अधिक नाम अब भी विचाराधीन हैं।

नंदीग्राम में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से लगभग 11,000 नाम हटा दिए गए हैं।

तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने भाजपा द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची को ‘‘राजनीतिक नाटक’’ करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘भवानीपुर से सुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारना जमीनी हकीकत से ज्यादा दिखावे की बात है। भाजपा जानती है कि मुख्यमंत्री का इस निर्वाचन क्षेत्र में मजबूत जनसमर्थन है।’’

भाषा धीरज राजकुमार

राजकुमार