बंगाल: उपस्थिति की अनिवार्यता को लेकर विरोध के बाद कॉलेज की उपप्राचार्य ने इस्तीफा दिया

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बंगाल: उपस्थिति की अनिवार्यता को लेकर विरोध के बाद कॉलेज की उपप्राचार्य ने इस्तीफा दिया

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 04:00 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 04:00 PM IST

कोलकाता, 11 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की उपप्राचार्य ने शुक्रवार को सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने के लिए उपस्थिति की अनिवार्यता के विरोध में विद्यार्थियों के एक वर्ग के प्रदर्शन के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मोहम्मदी तरन्नुम ने विद्यार्थियों द्वारा करीब 23 घंटे तक उनके कक्ष के बाहर धरना देकर घेराव किए जाने के बाद इस्तीफा सौंपा।

तरन्नुम ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।

उन्होंने अपना इस्तीफा कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति और उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया है।

तरन्नुम ने आरोप लगाया कि वह ‘साजिश की शिकार’ हुई हैं और घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने उन्हें पानी, बिजली और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होने दीं।

उन्होंने कहा, “विद्यार्थियों को अनुशासित करने के कदम का विरोध करने वाले कुछ लोग मुझे पद से हटाने पर अड़े हुए थे। मैं उच्च शिक्षा मंत्री से अपील करती हूं कि वह इस गलत (कार्य) को सुधारे। मै परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता पर विश्वास करती हूं। ”

तरन्नुम ने कहा, “विद्यार्थियों के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि मेरे तृणमूल कांग्रेस से संबंध हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हां, अतीत में मेरा वामपंथी राजनीति से जुड़ाव रहा है, लेकिन मैंने कभी किसी के हित में काम नहीं किया। विद्यार्थियों के दबाव के कारण मुझे इस्तीफा देना पड़ा।”

उपप्राचार्य ने दावा किया कि उन्होंने गतिरोध खत्म करने के लिए हस्तक्षेप की मांग करते हुए मामले की जानकारी शासी परिषद के अध्यक्ष कौस्तव बागची, उच्च शिक्षा विभाग और कलकत्ता विश्वविद्यालय को दी थी, लेकिन ‘कोई भी आगे नहीं आया’।

कॉलेज परिसर से निकलते समय विद्यार्थियों ने नारेबाजी की और उनकी कार को घेर लिया।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब कॉलेज ने एक नोटिस जारी कर कहा कि जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति कम से कम 75 प्रतिशत नहीं होगी, उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इसके बाद परीक्षा फॉर्म भरने को लेकर मामला और बढ़ गया।

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने कहा कि शासी परिषद के अध्यक्ष, भाजपा विधायक और वकील कौस्तव बागची ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था और कहा था कि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्रों को स्व-घोषणा पत्र जमा करने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।

विद्यार्थियों ने कहा कि फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान उपस्थिति का मानदंड विवाद का विषय बना रहा और यह तय किया गया कि छात्रों के लिए कम से कम 40 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी होगी।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश