बंगाल सरकार ने खनन के लिए जमीन अधिग्रहण में आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं की: कैग रिपोर्ट
बंगाल सरकार ने खनन के लिए जमीन अधिग्रहण में आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं की: कैग रिपोर्ट
कोलकाता, छह अगस्त (भाषा) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान आदिवासियों के हितों की रक्षा करने में पश्चिम बंगाल सरकार की ‘‘नाकामी’’ को रेखांकित किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके कारण 2017-18 से 2021-22 के बीच पांच वित्तीय वर्षों में आदिवासियों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया। इस अवधि के दौरान तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी।
कैग ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन के ऑडिट में राजस्व अधिकारियों, जिलाधिकारियों तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों की निष्क्रियता और भागीदारी के अभाव के कारण पुनर्वास संबंधी कार्यों पर असर पड़ा।
इस ऑडिट में 2017-18 से 2021-22 के बीच जमीन अधिग्रहण के 66 मामलों को शामिल किया गया, जिनमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के सालानपुर, श्रीपुर, कुनुस्तोरिया और परबेलिया इलाके और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) का बराकर इलाका शामिल था।
कैग रिपोर्ट में बताया गया कि 17.79 करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार मूल्य के मुकाबले ईसीएल और बीसीसीएल ने बातचीत के जरिए जमीन खरीदने के लिए आदिवासी लोगों को सिर्फ 2.55 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इससे 15.25 करोड़ रुपये का कम भुगतान हुआ जो बाजार मूल्य का 85.68 प्रतिशत है।
इसके अलावा, कंपनियां ‘जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ के तहत अनिवार्य 100 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान करने में भी नाकाम रहीं, जिससे आदिवासी 17.80 करोड़ रुपये और पाने से वंचित रह गए।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कानून के तहत अनिवार्य बाजार मूल्य पर सालाना 12 प्रतिशत का अतिरिक्त मुआवजा, किसी भी मामले में नहीं दिया गया जिनमें जांच की गई थी।
रिपोर्ट में ईसीएल द्वारा जमीन की कीमतों के भुगतान में भारी अंतर को भी उजागर किया गया।
भाषा सुरभि वैभव
वैभव

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