बंगाल : हार के बाद तृणमूल नेतृत्व पर भड़के नेता, प्रशासनिक विफलता और मनमानी के लगाए आरोप

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बंगाल : हार के बाद तृणमूल नेतृत्व पर भड़के नेता, प्रशासनिक विफलता और मनमानी के लगाए आरोप

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 12:01 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 12:01 PM IST

कोलकाता, सात मई (भाषा) ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कुछ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों करारी हार के बाद खुलकर पार्टी नेतृत्व की आलोचना शुरू कर दी और हार के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया।

पूर्व क्रिकेटर और प्रदेश के पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनकी ‘‘असुरक्षा की भावना’’ के कारण विकास परियोजनाओं को लागू नहीं होने दिया गया।

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में तिवारी ने कहा, ‘‘इस भ्रष्ट सरकार को जनता ने वही जवाब दिया जिसकी वह हकदार थी, क्योंकि उसने कभी लोगों के हित में काम नहीं किया और केवल अपने निजी हितों की चिंता की।’’

तिवारी 2021 में हावड़ा जिले की शिवपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे, लेकिन 2026 के चुनाव में उन्हें तृणमूल ने टिकट नहीं दिया। उनकी जगह उम्मीदवार बनाए गए राणा चटर्जी भाजपा के अभिनेता-नेता रुद्रनील घोष से 16 हजार से अधिक मतों से हार गए।

तिवारी ने आरोप लगाया कि वह हावड़ा में एथलेटिक्स केंद्र विकसित करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने जमैका के ओलंपियन धावक योहान ब्लेक को परियोजना से जोड़ा था, लेकिन खेल मंत्री अरूप विश्वास ने इस परियोजना को इसलिए रोक दिया क्योंकि इससे उन्हें पहचान मिलने की संभावना थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रमों में उन्हें बार-बार अपमानित किया गया। तिवारी ने कहा, ‘‘खेल विभाग में मेरा काम केवल चाय और बिस्कुट तक सीमित था। मुझे कार्यक्रमों में मंच पर भी नहीं बुलाया जाता था।’’

तिवारी ने पिछले वर्ष साल्ट लेक स्टेडियम में हुए लियोनेल मेसी विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्हें पहले ही अंदेशा था कि ऐसा कुछ होगा।

उन्होंने दावा किया कि शिवपुर में विकास कार्यों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।

तिवारी ने कहा, ‘‘एक कैबिनेट बैठक में मैंने सीधे मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कहा कि क्या मेरे पास और कोई काम नहीं है? उसी दिन मुझे लगा कि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।’’

तृणमूल प्रवक्ता रीजू दत्ता ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान भाजपा के पक्ष में रुझान आने के बाद कुछ लोगों ने उनके ससुराल वालों पर हमला किया, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनकी मदद की अपील पर ध्यान नहीं दिया।

दत्ता ने कहा, ‘‘मेरे घर पर हमले के दौरान मुझे अपनी पार्टी से नहीं, बल्कि भाजपा नेताओं से मदद मिली, जिन्होंने स्थिति को बिगड़ने से रोकने की कोशिश की।’’

तृणमूल के सांसद और अभिनेता देव ने सोशल मीडिया पर भाजपा को जनादेश मिलने पर बधाई दी और नई सरकार से बांग्ला फिल्म उद्योग में ‘‘प्रतिबंध और विभाजन’’ की संस्कृति समाप्त करने का आग्रह किया।

पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल से सांसद देव ने कहा कि वह घाटाल मास्टर प्लान को पूरा करने के लिए नयी सरकार के सहयोग की अपेक्षा करते हैं।

तृणमूल के कई नेताओं, जिनमें पार्टी के राज्य महासचिव कृष्णेंदु नारायण चौधरी और कोलकाता के उपमहापौर अतिन घोष शामिल हैं, ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें पार्टी के कमजोर होने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

बेहाला पश्चिम सीट से तृणमूल उम्मीदवार रत्ना चटर्जी ने भी यह कहते हुए निराशा जताई कि जरूरत के समय वह उनका पार्टी नेतृत्व से संपर्क तक नहीं हो पाया। वह भाजपा उम्मीदवार इंद्रनील खान से लगभग 25 हजार मतों से हार गईं।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं द्वारा व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं और उन्हें पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी बयान ही पार्टी का अधिकृत पक्ष माने जाएंगे।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव